जम्मू संभाग के ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में शिक्षकों का टोटा है, लेकिन शहरों में शिक्षक सरप्लस हैं। जिला मुख्यालय के स्कूलों और शिक्षा विभाग के कार्यालय में शिक्षक लंबे समय से डटे हैं। जम्मू संभाग में दो हजार तो जम्मू जिले में छह सौ सरप्लस शिक्षक हैं। इनमें तो कुछ ऐसे भी हैं जिनका नियुक्ति के बाद कभी तबादला ही नहीं हुआ।
शहर के हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में स्वीकृत पद सात हैं, लेकिन वहां 15 शिक्षक तैनात है। हाई स्कूलों में ऐसी स्थिति सबसे ज्यादा हैं, जिसमें बड़े अधिकारियों के रिश्तेदारों की संख्या ज्यादा है। रामबन, रियासी, राजोरी, कठुआ, डोडा, किश्तवाड़ जिलों के दूरदराज क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी है।
स्कूल शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार ग्रामीण जिलों के प्राइमरी स्कूलों में दो-दो, मिडिल स्कूल में चार से सात और हाई स्कूल में आठ से नौ जबकि हायर सेकेंडरी में 15 तक ही शिक्षक हैं, जबकि शहरों के प्राइमरी स्कूलों में पांच से छह शिक्षक तैनात हैं।
हाई स्कूलों में सबसे ज्यादा दस से 15 शिक्षक हैं। इनमें ऐसे शिक्षक हैं जो पांच से छह वर्षों से सरप्लस हैं। उनके मूल तैनाती स्थल पर पद खाली हैं, लेकिन रसूख के चलते वह शहर के स्कूलों और विभाग के कार्यालयों में काम कर रहे हैं।
सरप्लस शिक्षकों के तबादले के लिए विभाग की हर पहल विफल होती दिख रही है। युक्तिकरण अभियान से भी सरप्लस शिक्षक अछूते हैं। स्कूल शिक्षा निदेशालय में ही 50 से अधिक शिक्षक हैं, जो लंबे समय से अटेचमेंट लेकर बैठे हैं।
वहीं जिला शिक्षा अधिकारी और जोनल शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में शिक्षक काम कर रहे हैं, जबकि उनके मूल तैनाती स्थल पर शिक्षकों की कमी है। रामबन, रियासी, राजोरी, कठुआ, डोडा, किश्तवाड़ जिलों के दूरदराज क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी है।
स्कूल शिक्षा विभाग सरप्लस शिक्षकों की संख्या बताने से भी परहेज करता है, क्योंकि शहरों में डटे अधिकांश सरप्लस शिक्षकों का या तो किसी प्रशासिनक अधिकारी या फिर राजनेताओं से संबंध है। जरनल लाइन टीचर फोरम के अध्यक्ष नीजर शर्मा ने कहा कि सरप्लस शिक्षकों को गांवों में भेजने की जरूरत है। विभाग को ऐसे शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।