रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेशकों को लुभाने के लिए अब जम्मू के बाद राजधानी श्रीनगर में अगस्त में रियल एस्टेट सम्मेलन करवाने की तैयारी है। कन्फेडरेशन आफ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन आफ इंडिया (क्रेडाई) और जम्मू-कश्मीर प्रशासन को प्रदेश में किफायती और गुणवत्तापूर्ण आवासीय बुनियादी ढांचा प्रदान करने की संभावनाओं को तलाशने को कहा गया है। अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद हाल ही में प्रधानमंत्री के जम्मू दौरे के बाद औद्योगिक और रियल एस्टेट में नई पहल के लिए प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मंगलवार को विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर रियल एस्टेट सम्मेलन और उससे जुड़ी तैयारियों पर चर्चा की। ज्ञात हो कि पहला रियल इस्टेट सम्मेलन पिछले साल दिसंबर में जम्मू में हुआ था जिसमें कई समझौते हुए थे।
सार्वजनिक सेवा वितरण प्रणाली को बेहतर बनाना
उपराज्यपाल ने कहा कि हम अपने शहरों को बेहतर बनाने के लिए व्यवस्थित प्रयास कर रहे हैं। विकास के लिए अभूतपूर्व अवसर लाए गए हैं। प्रभावी उपायों का उद्देश्य शहर की सेवाओं में सुधार, मजबूत शहरी बुनियादी ढांचे का निर्माण और गुणवत्तापूर्ण जीवन के लिए सार्वजनिक सेवा वितरण प्रणाली को बेहतर बनाना है। क्रेडाई के अध्यक्ष निर्वाचित बोमन ईरानी ने संगठन के विजन और मिशन पर बताया कि देशभर में रियल एस्टेट के परिदृश्य को बदलने का प्रयास किया जा रहा है। इसका उद्देश्य आम आदमी को अच्छी गुणवत्ता वाले किफायती आवास प्रदान करना है।
फिल्म, आतिथ्य और बुनियादी ढांचे पर समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर
प्रमुख सचिव आवास धीरज गुप्ता ने रियल एस्टेट डेवलपर्स के लिए नीति ढांचे को प्रोत्साहित करने, मौजूदा ढांचे को आसान बनाने पर प्रस्तुति दी। प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न निजी निवेश घरानों के साथ फिल्म, आतिथ्य और बुनियादी ढांचे पर समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। दिसंबर 2021 में जम्मू में पहले रियल एस्टेट सम्मेलन में कई समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए थे। बैठक में व्यक्तिगत और वर्चुअल माध्यम से मुख्य सचिव डॉ. अरुण कुमार गुप्ता, एलजेके इकोनॉमिक ग्रोथ एंड डेवलपमेंट (लीड) और टाउन प्लानिंग सलाहकार आदि प्रतिनिधि जुड़े।
देश के अन्य शहरों के मॉडल का होगा अध्ययन
उपराज्यपाल ने कहा कि आम आदमी के लिए सर्वोत्तम आवश्यक बुनियादी सेवाओं से लैस किफायती, समावेशी, पारिस्थितिक रूप से टिकाऊ आवास बनाने के लिए देश के अन्य शहरों के मॉडल का अध्ययन किया जाएगा। बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित करके परामर्श प्रक्रिया में सहभागीदारी को सुनिश्चित बनाया जाए।
पीएम से मुलाकात में निवेशकों ने निवेश के लिए जताई सहमति
जम्मू-कश्मीर के औद्योगिक क्षेत्र में नई कहानी लिखी जा रही है। यह प्रदेश देश में शीर्ष निवेश गंतव्य बनने की ओर अग्रसर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के शिष्टमंडल से मुलाकात के बाद प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में विदेशी निवेश की प्रक्रिया बढ़ेगी। आजादी के सात दशक में जम्मू कश्मीर में सिर्फ 17 हजार करोड़ रुपये का निजी निवेश हो सका था, लेकिन पिछले दो साल में यह आंकड़ा 38 हजार करोड़ के करीब पहुंच गया है।
जम्मू-कश्मीर में निवेश के माहौल में और बेहतरी मानी जा रही
प्रधानमंत्री के दौरे से जम्मू-कश्मीर में निवेश के माहौल में और बेहतरी मानी जा रही है। प्रधानमंत्री से मिलने के बाद उत्साहित निवेशकों ने जम्मू-कश्मीर में विभिन्न क्षेत्रों में निवेश पर सहमति जताई है। जम्मू-कश्मीर में 16 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव पाइपलाइन में हैं। इस साल के अंत तक 75 हजार करोड़ रुपये का निवेश लाने का लक्ष्य रखा गया है। यूएई से ही करीब दस हजार करोड़ रुपये का निवेश आने की उम्मीद है। इस निवेश से रोजगार बढ़ने के साथ जम्मू-कश्मीर के यूएई से कूटनीतिक रिश्ते मजबूत होंगे।
जमीन खरीदने वाले पहले प्रमुख निगम बने हैं
जेएसडब्ल्यू स्टील लिमिटेड और अपोलो हॉस्पिटल्स इंटरप्राइजेज लिमिटेड अपनी परियोजनाओं के लिए जम्मू-कश्मीर में जमीन खरीदने वाले पहले प्रमुख निगम बने हैं। जेएसडब्ल्यू को पुलवामा के सलीपोरा औद्योगिक क्षेत्र में 150 करोड़ रुपये का स्टील प्लांट स्थापित करने के लिए 70 कनाल भूमि (8.75 एकड़) सौंपी गई है। अपोलो अस्पताल जम्मू क्षेत्र में 250 बिस्तर वाला सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल स्थापित कर रहा है। प्रशासन ने जम्मू के मीरां साहिब में एक मेडिसिटी के लिए 100 कनाल (12.5 एकड़) भूमि निर्धारित की है।
पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए हाईटेक निवेश लाया जा रहा
कश्मीर में मेडिसिटी दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के सेमपोरा में 368 कनाल (46 एकड़) भूमि चिह्नित की है। उद्योग विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए हाईटेक निवेश लाया जा रहा है। पिछले दो वर्ष में जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक क्षेत्र में नए आयाम लिखे गए हैं।