पुंछ में आतंकियों से बरामद सामान
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पिछले ढाई वर्षों से अधिक समय से चैन की नींद सो रहे भारत पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पर स्थित पुंछ जिले के करमाड़ा क्षेत्र के ग्रामीणों की बुधवार को गांव के बाहर अचानक शुरू हुई गोलियों की गूंज से नींद टूट गई। इससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल बन गया और किसी अनहोनी से करमाड़ा एवं पोलस निवासी उजाला होने तक अपने घरों में डरे सहमे और दुबके रहे।
अधिकतर ग्रामीणों को इस बात का डर सताने लगा कि कहीं पाकिस्तान की तरफ से फिर से नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम का उल्लंघन करते हुए गोलीबारी तो नहीं शुरू कर दी गई है। उजाला होने के साथ ही जब ग्रामीणों को क्षेत्र में सेना एवं पुलिस द्वारा तलाशी अभियान चलाए जाने और नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ की कोशिश नाकाम बनाने की जानकारी मिली तो लोगों ने राहत की सांस ली।
करमाड़ा और नियंत्रण रेखा पर स्थित आखिरी गांव पोलस जिससे कुछ मीटर की दूरी पर देर रात्रि दो बजे के करीब अचानक गोलीबारी शुरू हुई। इससे ग्रामीणों की नींद टूट गई।गांव के बाहर कुछ दूरी पर ढाई वर्षों के बाद होने वाली गोलीबारी ने हर किसी को दहशत में डाल दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि हमें तो ऐसा लगा कि पाकिस्तानी सेना ने फिर से नापाक हरकत शुरू कर दी है और अब यहां हर दिन फिर से गोलियों की गड़गड़ाहट शुरू होने लगेगी। न जाने यह गोलीबारी किसकी जान लेगी। हालांकि एक घंटे के बाद गोलीबारी बंद हो गई।
डर के मारे हम लोगों को नींद ही नहीं आ रही थी। रात तीन बजे गोलीबारी थमने के बाद आैर उजाला होने के बीच के दो घंटे हमारे लिए दो रातों के समान हो गए थे। हम बार बार समय देख रहे थे कि कब उजाला हो और हम घर से बाहर निकल कर पता लगा सकें कि गोलीबारी कहां और क्यों हुई है।
अंधरे में घर से बाहर निकालने की हिम्मत कोई भी नहीं जुटा पा रहा था और न ही कोई किसी को फोन कर कुछ पूछने का साहस दिखा रहा था। उधर सेना की तरफ से नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ को नाकाम बनाए जाने पर ग्रामीणों ने खुशी का इजहार करते हुए सेना की कार्रवाई की प्रशंसा करते हुए इसे उचित कदम बताया है।