डॉ पदमा गुरमेट ने हिंदी की महत्ता पर विचार-विमर्श
लेह। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोवा-रिग्पा ने हिंदी दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया। इसका उद्घाटन राष्ट्रीय अध्यक्ष आरोग्य भारती डॉ. राकेश पंडित और आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संयोजक संजीवन ने किया।
इस अवसर पर संस्थान की निदेशक डॉ. पदमा गुरमेट ने सरकारी कार्यालयों में हिंदी के महत्व और सरकारी भाषा के रूप में इसके उपयोग के नियमों पर प्रकाश डाला। उन्होंने हिंदी के सांविधानिक इतिहास की चर्चा की और बताया कि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को भारत की आधिकारिक भाषा के रूप में स्वीकार किया था। उन्होंने केंद्र सरकार के कर्मचारियों की हिंदी के प्रचार-प्रसार में भूमिका पर भी जोर दिया, विशेषकर लद्दाख में सेना और अर्धसैनिक बलों के योगदान पर। कार्यक्रम में एनआईएसआर के प्रो. डॉ. नवांग तांगियस और सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ बौद्ध अध्ययन के प्रोफेसर डॉ. जिग्मेट मिंगुर ने हिंदी की भूमिका और इसके महत्व पर व्याख्यान दिया।