जम्मू। फ्लोरीकल्चर विभाग कर्मचारियों के एक समूह को लंबे समय से प्रतीक्षित राहत प्रदान करते हुए जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट ने लगभग तीन दशकों की निरंतर सेवा के बाद उनके नियमितीकरण को बरकरार रखा है। इस आदेश के खिलाफ प्रदेश प्रशासन की याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायाधीश सिंधु शर्मा व राजेश सेखरी की खंडपीठ ने वर्चुअल माध्यम से मामले की सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया कि 1993 से निरंतर सेवा के बावजूद इन कर्मचारियों को नियमित दर्जा देने से इन्कार करना घोर अन्याय है। प्रतिवादी 1993 में विभाग में पार्कों और उद्यानों के रखरखाव के लिए दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी के रूप में कार्यरत थे। विभाग द्वारा उनके मामलों को नियमितीकरण के लिए बार-बार सिफारिश की गई, लेकिन 2016 में इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि वे 1994 के एसआरओ 64 के अंतर्गत नहीं आते। पीठ ने कहा कि प्रतिवादियों की लंबी और निर्बाध सेवा जो अब 30 वर्षों से भी अधिक हो गई है को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके निरंतर योगदान के लिए समान व्यवहार जरूरी है।