लेह। आयुष मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाले राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड ने औषधीय पौधों के संरक्षण के लिए केंद्रीय क्षेत्र योजना लागू की है। इसके तहत आयुष मंत्रालय ने लेह में केंद्रीय बौद्ध अध्ययन संस्थान (सीआईबीएस) में हर्बल गार्डन की स्थापना परियोजना प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस परियोजना के लिए 1.35 लाख रुपये का बजट आवंटित किया गया है। इसका उद्देश्य संस्थान में एक समर्पित हर्बल गार्डन की स्थापना करना है, जो पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के लिए आवश्यक औषधीय पौधों के संरक्षण और संवर्धन में योगदान देगा।
इसके अलावा लद्दाख के ठंडे रेगिस्तान में प्राथमिकता वाले औषधीय पौधों की संरक्षण स्थिति, जर्मप्लाज्म संग्रह और संसाधन वृद्धि पर केंद्रित एक और विस्तृत परियोजना को भी मंजूरी दी गई है। 156.84 लाख रुपये की मंजूरी के साथ इस परियोजना को हिमालयन फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (एचएफआरआई) और राष्ट्रीय सोवा-रिग्पा संस्थान (एनआईएसआर), लेह द्वारा संयुक्त रूप से लागू किया जा रहा है। यह परियोजना लद्दाख की अनूठी औषधीय वनस्पतियों की समझ और संरक्षण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जो पारंपरिक चिकित्सा और वाणिज्यिक अनुप्रयोगों के लिए अपार संभावनाएं रखती हैं।
इन पहलों को आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में उजागर किया, जिसमें लद्दाख में पारंपरिक चिकित्सा और जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा देने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया गया।