लेह। लेह एपेक्स बॉडी (एलऐबी) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) ने चेतावनी दी कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार उनके चार-सूत्री एजेंडा पर चर्चा फिर से शुरू नहीं करेगी तो वे पूरे लद्दाख में एक जोरदार आंदोलन शुरू करेंगे।
इस एजेंडे में छठी अनुसूची के तहत सांविधानिक सुरक्षा, लेह और कारगिल के लिए दो अलग-अलग लोकसभा सीटों का निर्माण, लद्दाख के लिए एक अलग लोक सेवा आयोग और क्षेत्र के लिए राज्य का दर्जा शामिल है। यह बयान लेह में एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिया गया। यहां दोनों संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपने नेताओं और लद्दाख पर उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचपीसी) के बीच चर्चा फिर से शुरू करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
लेह एपेक्स बॉडी के अध्यक्ष छेरिंग दोरजे ने कहा कि एलएबी-केडीए नेतृत्व की बैठक का फोकस हाल ही में मीडिया रिपोर्टों पर था, जिसमें भारत सरकार द्वारा लद्दाख हिल डेवलपमेंट काउंसिल्स को मजबूत करने और केंद्र शासित प्रदेश में अतिरिक्त जिलों के निर्माण सहित अन्य विकास पहलों की योजना बताई गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये उपाय स्वागत योग्य हैं, लेकिन वे चार-सूत्री एजेंडा में उठाई गई मुख्य मांगों को पूरा नहीं करते हैं। इसलिए उन्हें लद्दाख के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
दोरजे ने कहा, लद्दाख के लिए बजटीय आवंटन बढ़ाना, लद्दाख स्वायत्त हिल विकास परिषदों के लिए धन में वृद्धि करना और कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे में सुधार करना जैसी पहलों को सरकार के एजेंडे का हिस्सा माना जाता रहा है। हालांकि, हमारा नेतृत्व चार-सूत्री एजेंडा के प्रति प्रतिबद्ध है। हम जल्द ही अपनी मांगों को आगे बढ़ाने के लिए एक आंदोलन का रोडमैप घोषित करेंगे।
जिला कांग्रेस समिति कारगिल के अध्यक्ष और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के एक प्रमुख सदस्य नासिर मुंशी ने लद्दाखी नेताओं और उच्चाधिकार प्राप्त समिति के बीच हुई पिछली बैठकों की असफलता को उजागर किया। उन्होंने कहा कि ये चर्चाएं लोकसभा चुनावों के कारण बाधित हो गईं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चुनाव के बाद वार्ता फिर से शुरू करने का वादा किया था। मुंशी ने इस आश्वासन के बावजूद वार्ता शुरू न होने पर निराशा व्यक्त की, जिससे एलएबी-केडीए को अपनी दीर्घकालिक मांगों के लिए अधिक आक्रामक उपायों पर विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
मुंशी ने यह भी खुलासा किया कि उनके नव-निर्वाचित सांसद ने नई दिल्ली में नेतृत्व से संपर्क किया। कई मंत्रियों और राजनीतिक हस्तियों को पत्र भेजे और लद्दाख की मांगों पर जोर दिया। इसके अतिरिक्त एलएबी और केडीए के एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने कारगिल विजय दिवस की 25वीं वर्षगांठ के दौरान द्रास में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और चार-सूत्री एजेंडा पर चर्चा फिर से शुरू करने की वकालत करते हुए एक ज्ञापन प्रस्तुत किया।
उन्होंने कहा कि हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि हाल ही में घोषित उपायों का एलएबी-केडीए नेतृत्व के एजेंडा से कोई संबंध नहीं है। हमारी एकमात्र चिंता चार-सूत्री एजेंडा में उठाई गई मांगों का समाधान है, जैसा कि लद्दाख के लोगों द्वारा चाहा गया है। मुंशी ने कहा कि लद्दाखी शांति-प्रिय लोग हैं जो रचनात्मक संवाद चाहते हैं, लेकिन यदि केंद्र सरकार सकारात्मक प्रतिक्रिया देने में विफल रहती है, तो यह लद्दाख के लोगों के साथ टकराव की स्थिति पैदा कर सकता है।
भविष्य की कार्रवाई के बारे में मुंशी ने उल्लेख किया कि आगामी कोर समिति की बैठक के बाद एलएबी-केडीए नेतृत्व लद्दाख के शिक्षित बेरोजगार युवाओं के साथ बातचीत करेगा और इस आंदोलन में उनकी सक्रिय भागीदारी की मांग करेगा। उन्होंने जोर दिया कि क्षेत्र में बेरोजगारी एक शीर्ष प्राथमिकता है।