सांबा। जिले के गगींथ गांव की ज्योति काॅटल ने कड़ी मेहनत से अपनी तकदीर बदली और मुकाम पाया। उन्होंने दस वर्ष पहले घर में दो दुधारू पशु रखे और उनका दूध बेचना शुरू किया। इसके बाद उम्मीद योजना के साथ जुडीं और योजना के तहत बैंक से ऋण लिया। गांव में ही छोटी सी दुकान खोली। महिलाओं को उम्मीद योजना के साथ जोड़ा। दस-दस महिलाओं के ग्रुप बनाए। उन्हें बैंक से ऋण दिला कर छोटे-छोटे कारोबार शुरू किए। इसके बाद जम्मू कश्मीर मिल्क प्रोड्यूसर कोआप्रेटिव सोसायटी ने उन्हें बतौर सुपरवाइजर तैनात किया। ज्योति ने बताया कि उन्होंने 50 ग्रुप बनाए और प्रत्येक ग्रुप में 30 महिलाओं को जोड़ा। उन्हें दूध की जांच के लिए मशीनें उपलब्ध करवाई। गांवों में जिन लोगों ने पशु रखे थे उनके घरों से दूध जमा करना शुरू किया। आज योजना के तहत 1500 लोगों को रोजगार मिला है। ज्योति ने कहा कि पहले लोगों के घरों में ही दूध की खपत हो जाती थी। बेचने का कोई साधन नही था, आज जितना भी दूध मिलता है वह सोसायटी को बेचा जा रहा है। वाहन गांव-गांव से दूध को एकत्रित कर रहे हैं। ज्योति ने बताया कि उन्होंने योजना के तहत अपने साथ 1500 लोगों को रोजगार दिया है। पहले उनके पति किसी का वाहन चलाते थे। आज अपना वाहन ले लिया है। योजना से जुड़कर वह आर्थिक रूप से भी मजबूत हुई हैं।