रामगढ़। संघर्ष विराम समझौते से पहले सीमावर्ती क्षेत्र से ज्यादातर लोग प्रशासनिक आदेश पर सुरक्षित स्थानों पर चले गए थे। प्रशासन की ओर से वाहनों के पूरे प्रबंध किए गए थे। लोगों का कहना है कि वह सेना के साथ मिलकर दुश्मन का मुकाबला करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। बॉर्डर के लोगों का कहना है कि उनमें से ज्यादातर सेना से सेवानिवृत्त हुए हैं। आज भी जरूरत पड़ने पर दुश्मन को जवाब देने का साहस रखते हैं। सेना के शौर्य पर हमें पूरा विश्वास है।