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Jammu News: 1989 और 1991 में अनुसूचित जनजाति में शामिल लोगों को ही मिले आरक्षित सीटों पर चुनाव लड़ने का अधिकार

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जम्मू। जम्मू-कश्मीर में 1989 और 1991 में 12 जातियों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिला था। इसके बाद 2022 में परिसीमन आयोग की तरफ से इन जनजातियों के लिए विधानसभा में नौ सीटों को आरक्षित किया गया था। ऐसे में 2024 में जिन चार जातियों के लिए अलग से अनुसूचित जनजाति (एसटी-2) बनाया, उन्हें नौ आरक्षित सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए योग्य नहीं माना जाना चाहिए। यह बात जम्मू-कश्मीर गुज्जर-बकरवाल कोऑर्डीनेशन कमेटी के संयोजक मोहम्मद अनवर चौधरी (एडवोकेट) ने कही।
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उन्होंने कहा कि सरकार ने जिन चार जातीय समूह को 10 फीसदी आरक्षण दिया, वह पहले से अनुसूचित जनजाति से अलग हैं। ऐसे में उन्हें 2022 में आरक्षित की नौ विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं है। इन सीटों पर चुनाव लड़ने का अधिकारी एसटी-1 के लोगों को ही है।
उन्होंने कहा कि इसको लेकर हमने चुनाव आयोग से मुलाकात का समय मांगा था। इस संबंध में मंडलायुक्त जम्मू को पत्र भी लिखा था। उन्होंने मुलाकात करवाने का आश्वासन दिया था, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। सदस्यों ने कहा कि हमने चुनाव आयोग, गृह मंत्रालय, अनुसूचित जाति व जनजाति मंत्रालय, उप राज्यपाल जम्मू-कश्मीर और रजिस्ट्रार जनरल जनगणना भारत सरकार को पत्र लिखा है। सदस्यों ने सरकार से मांग की कि सभी डीसी को ये निर्देश दें कि वह लोगों को जागरूक करें कि आरक्षित सीटों पर एसटी-2 के नामांकन को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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