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Jammu News: मोदी 3.0 के पहले एक महीने में 5 आतंकी हमले, सब जम्मू में

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जम्मू। सीमा पार बैठे आतंकी संगठनों को पीएम नरेंद्र मोदी का तीसरा कार्यकाल रास नहीं आ रहा। मोदी 3.0 के पहले एक महीने में जम्मू कश्मीर में 5 आतंकी हमले हुए हैं। इन पांचों हमलों में 10 नागरिकों की मौत और 5 जवान बलिदान हो गए। खासकर कठुआ में दो बार हमला हुआ। रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि कठुआ में हमलों का बड़ा कारण इस क्षेत्र से सेना की राष्ट्रीय राइफल (आरआर ) का हटना है। आतंकी रणनीति से नहीं बल्कि अवसर देखकर हमला कर रहे हैं। वह साफ्ट टारगेट देखकर निशाना बना रहे हैं।
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इस हमले मेंं आतंकियों का वहीं दल हो सकता है, जिसने 5 हफ्ते पहले हीरानगर बार्डर से घुसपैठ की थी। बता दें कि नरेंद्र मोदी ने 9 जून को पीएम पद की शपथ ली थी। शपथ ग्रहण के दिन ही आतंकियों ने रियासी में पर्यटकों की बस पर हमला कर दिया था। तब से यह सिलसिला जारी है। एक के बाद एक भद्रवाह, भलोसा, कठुआ, पुंछ में हमले हुए।
बनी के आगे आरआर नहीं
बनी छत्रगला, गंदोह रूट का आतंकी इस्तेमाल कर रहे हैं। यह रूट चरवाहों का रूट रहा है। छत्रगला से कठुआ की तरफ सेना की राष्ट्रीय राइफल (आरआर) नहीं है। इसलिए आतंकी इस क्षेत्र में रणनीति से नहीं, अवसर देखकर हमला कर रहे हैं। वह साफ्ट टारगेट देख रहे हैं। उनसे जबरदस्ती घुसपैठ कराकर हमले कराए जा रहे हैं। जम्मू में आतंकवाद का शिफ्ट होना भी इसी का हिस्सा है। क्योंकि कश्मीर में वह साफ्ट टारगेट नहीं ढूंढ पा रहे हैं। इसलिए जम्मू में साफ्ट टारगेट बना हमला कर रहे।
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-विजय सागर धीमान, पूर्व ब्रिगेडियर

बार्डर पार से आए दल का ही हिस्सा
पांच हफ्ते पहले हीरानगर बाॅर्डर से आतंकियों का दल घुसा था। पहले इस दल ने उधमपुर के बसंतगढ़ में वीडीजी सदस्य पर हमला किया। इसके बाद यह दल दो हिस्सों में बंट गया। एक दल ने भद्रवाह में सैन्य अस्थायी कैंप और भलेसा में पुलिसकर्मियों पर हमला किया। बाद में इस दल के तीन आतंकी डोडा में मुठभेड़ के दौरान मारे गए। दूसरा दल अभी सक्रिय है। यह दल सोमवार को सैन्य वाहन पर हुए ग्रेनेड हमले में शामिल हो सकता है।
-एसपी वैद, पूर्व डीजीपी

जम्मू में कब कहां हमला, किसने किया
9 जून: रियासी आतंकी हमला: आतंकी संगठन टीआरएफ
12 जून: भद्रवाह छत्रगला अस्थायी सैन्य कैंप : जैश ए मोहम्मद
12 जून: गंदोह, भलेसा पुलिस नाके पर हमला: जैश ए मोहम्मद
12 जून: कठुआ, हीरानगर: टीआरएफ लश्कर
18 जून : पुंछ में एसओजी दल पर हमला: संभवता: टीआरएफ

कश्मीर में जारी संघर्ष
कश्मीर में सुरक्षाबलों ने 19 जून को बारामुला में दो आतंकियों, 6 जुलाई को कुलगाम में 4 आतंकियों को घेरकर ढेर किया था, जबकि 7 जुलाई को भी 2 आतंकी मारे गए। इस तरह से कश्मीर में आतंकियों से सेना का संघर्ष जारी है। वहां आतंकियों को हमला नहीं करने दिया जा रहा। आतंकियों को तलाश कर मारा जा रहा है।

प्रदेश में 100 से ज्यादा विदेशी आतंकी, चलाने वाला साजिद जट्ट
-जम्मू संभाग में सक्रिय रह चुका है, ओजी वर्करों के साथ मिलकर कर रहा हमले
जम्मू। पुलिस के सूत्रों के अनुसार, इस समय जम्मू-कश्मीर में 135 आतंकियों की मौजूदगी है। इनमें 110 विदेशी आतंकी हैं। अकेले राजोरी, पुंछ, रियासी और उधमपुर में इनकी संख्या 40 से 50 के बीच हो सकती है। यह आतंकी छोटे-छोटे समूहों में काम कर रहे हैं। इन आतंकियों को पाकिस्तान में मौजूद आतंकी साजिद जट्ट आपरेट कर रहा है, जिसने कश्मीर में शादी की हुई है। वह जम्मू संभाग के अलग-अलग जिलों में रह चुका है। जम्मू संभाग में होने वाले हमलों के पीछे साजिद का ही दिमाग है।
वह जम्मू संभाग में सक्रिय अपने ओजी वर्कर के साथ मिलकर काम कर रहा है। पाकिस्तान के आतंकियों को भेजकर अपने ओजी वर्कर की मदद से जम्मू में घुसपैठ कराकर हमले करवा रहा है। पिछले एक महीने में डोडा और कठुआ में मारे गए आतंकी भी विदेशी थे। वहीं, कश्मीर में अलग-अलग मुठभेड़ में मारे गए 8 आतंकियों में भी 6 विदेशी आतंकी हैं।
सूत्रों का कहना है कि जम्मू कश्मीर में स्थानीय आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन की सक्रियता न के बराबर है। पाकिस्तान में बैठे आतंकी संगठनों के पास जम्मू-कश्मीर में स्थानीय कैडर नहीं है। न ही कोई आका बचा हुआ है। इसलिए साजिद पाकिस्तान से आतंकियों को भेज रहा है।
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