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Jammu News: कभी हाथ फैलाते थे, आज कलम से बना रहे सुनहरा भविष्य

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कन्या हाई स्कूल में पढ़ाई करते बच्चे। डीसी सचिन कुमार और जिला सामाजिक कल्याण अ​धिकारी ममता राजप
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जम्मू। हाथों में किताबें और कलम। सामने टेबल पर जूस और बिस्कुट। चेहरों पर अलग ही मुस्कान दिख रही है। बीच-बीच में एक दूसरे से शरारतें करते रहे हैं। समझ चाहे न आ रहा हो, लेकिन एक-दूसरे को किताबें दिखा रहे हैं। कइयों ने उल्टी-सीधी चित्रकारी कर रखी है। एक अलग ही शोर सुनाई दे रहा है लेकिन इस शोर में वाहनों के तेज हार्न की आवाजें नहीं हैं। इस शोर में इनका उज्ज्वल भविष्य दिख रहा है। तभी तो आंखों में पढ़ाई की चमक साफ नजर आ रही है।
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यह दृश्य गांधी नगर शिक्षक भवन के नजदीक कन्या हाई स्कूल के एक क्लासरूम का है जहां उन बच्चों को पढ़ाया जा रहा है जो सड़कों पर भीख मांगते थे, दुकानों और लोगों के घरों पर बर्तन साफ करते थे। कूड़े के ढेर से कचरा उठाते थे। जिला प्रशासन ने शहर के अलग-अलग कोनों से इन बच्चों को मुक्त कराया। इनके हाथों से भीख का कटोरा और बर्तन छुड़ाकर कलम और किताबें थमाई। जिला प्रशासन ने भीख मांगने वाले और बाल मजदूरी करने वाले बच्चों के पुनर्वास के लिए एक विशेष मिशन शुरू किया है।
100 बच्चों की पहचान, 50 शिक्षा ग्रहण कर रहे
शहर के ज्यूल, सतवारी, बठिंडी, मराठा बस्ती, जानीपुर, त्रिकुटा नगर, गांधी नगर, नरवाल जैसे इलाकों से जिला प्रशासन और सामाजिक कल्याण विभाग ने मिलकर 100 बच्चों की पहचान की। इन जगहों पर होटलों, ढाबों, दुकानों, सड़कों, चौक पर सात से 16 वर्ष के यह बच्चे कहीं भीख मांग रहे थे। कहीं पर बर्तन साफ कर रहे थे। इन बच्चों को लोगों के चंगुल से मुक्त करवाया गया। मां-बाप की पहचान की गई। इनका मेडिकल करवाया गया। 100 में से 50 ने पढ़ाई में रुचि दिखाई और बताया कि वे पहले भी पढ़ते थे। बाकी के 50 को कौशल कार्य में लगाया गया जो पढ़ने में रूचि नहीं रखते थे।
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खाने से लेकर घर छोड़ने तक व्यवस्था
स्कूलों में छुट्टियां होने के बावजूद इन बच्चों के लिए सुबह आठ बजे से 11 बजे तक विशेष कक्षाएं लग रही हैं। शिक्षा विभाग की ओर से अलग से शिक्षकों को पढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन बच्चों को मिड-डे मील, जूस और बिस्कुट रिफ्रेशमेंट के तौर पर दी जा रही है। सुबह घर-घर से इन बच्चों को स्कूल पहुंचाना और फिर घर छोड़ने की व्यवस्था की गई है। किताबाें से लेकर अन्य पढ़ाई की सामग्री दी जा रही है।

ट्रेन से गिरी बोतलें नहीं उठानी पड़तीं
मराठा बस्ती में रहने वाला मध्यप्रदेश का एक बच्चा बताता है कि पहले प्रतिदिन सुबह होते ही मैं रेलवे लाइन की तरफ जाता था। गंदगी के बीच से निकलकर ट्रेन से नीचे फेंकी गई खाली बोतलें उठाता था। अब ऐसा नहीं करना पड़ता।
अब सड़क पर पांव नहीं जलते, जूते डालकर यहां आती हूं
जुबान लड़खड़ा रही है। ठीक से कुछ बताया नहीं जा रहा। बस इतना बोला कि अब सड़क पर पांव नहीं जलते। जूते डालकर यहां आती हूं। कक्षा में पढ़ने वाली छत्तीसगढ़ की एक बच्ची बताती है कि कैसे अब नंगे पांव भीख नहीं मांगनी पड़ती।

बच्चों का भविष्य उज्ज्वल बनाने का प्रयास
जिला प्रशासन की तरफ से ऐसे बच्चों की पहचान करने के लिए कहा गया था। इस कार्य के लिए दो प्रोटेक्शन अधिकारी नियुक्त किए। शहर के ऐसे इलाके चिन्हित किए गए्र जहां यह बच्चे भीख मांगते थे और बाल मजदूरी करते थे। इसके बाद इन्हें वहां से मुक्त कराया गया। बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए यह प्रयास किया गया है।
-ममता राजपूत, जिला सामाजिक कल्याण अधिकारी

हालात कुछ भी, शिक्षा सबका अधिकार
कूड़ा उठाने वाले, भीख मांगने वाले और बाल मजदूरी में लगे बच्चों के पुनर्वास के लिए विशेष मिशन शुरू किया गया है। इसी के तहत इनकी पहचान की गई है। शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है। चाहे वह किसी भी हालत में है। प्रशासन यह प्रयास आगे भी जारी रखेगा।
सचिन कुमार वैश्य, डीसी जम्मू

कन्या हाई स्कूल में पढ़ाई करते बच्चे। डीसी सचिन कुमार और जिला सामाजिक कल्याण अधिकारी ममता राजप

कन्या हाई स्कूल में पढ़ाई करते बच्चे। डीसी सचिन कुमार और जिला सामाजिक कल्याण अधिकारी ममता राजप

कन्या हाई स्कूल में पढ़ाई करते बच्चे। डीसी सचिन कुमार और जिला सामाजिक कल्याण अधिकारी ममता राजप

कन्या हाई स्कूल में पढ़ाई करते बच्चे। डीसी सचिन कुमार और जिला सामाजिक कल्याण अधिकारी ममता राजप

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