कठुआ। उधमपुर के डुडू बसंतगढ़ इलाके में 28 अप्रैल को एक वीडीजी सदस्य की हत्या के बाद से आतंकी इन इलाकों में सक्रिय रहे हैं। लगातार सुरक्षाबलों की ओर से इसके बाद से डुडू बसंतगढ़ से लेकर लोहाई, मल्हार, बदनोता, किंडली, ढग्गर, नुकनाली, छत्रगला के इलाकों में सर्च ऑपरेशन चलाए गए हैं।
ऐसा अंदेशा जताया जा रहा है कि यह वही आतंकियों का दल है, जिसने डुडू बसंतगढ़ में वीडीजी सदस्य की हत्या की थी। इस बार इनकी मौजूदगी लगातार इलाके में महसूस की जाती रही है। यह भी अंदेशा है कि आतंकी लगातार अपनी लोकेशन बदल-बदलकर सुरक्षा एजेंसियों की पहुंच से दूर रहने का प्रयास करते रहे हैं। लगभग ढाई महीने के लंबे समय तक इन इलाकों में सक्रिय रहना यह भी साफ इशारा करता है कि इन आतंकियों को स्थानीय स्तर पर लगातार मदद मिलती रही है।
11 जून को हीरानगर में सैडा सोहल इलाके में एनकाउंटर के दौरान आतंकियों ने देर रात छत्रगला में सेना और पुलिस की अस्थायी पोस्ट पर भी हमला कर दिया था। इसमें पांच सेना के जवान और एक पुलिसकर्मी घायल हुए थे। छत्रगला से लेकर लोहाई मल्हार का इलाका भौगोलिक दृष्टि से जुड़ा हुआ है। विरान पहाड़ों पर ढोंक में इन आतंकियों को इन दिनों जहां पनाह मिलने की आशंका है, वहीं ऐसा भी अंदेशा है कि स्थानीय स्तर पर भी इनकी मदद हो रही है। भोजन से लेकर राशन और अन्य जरूरतों को भी ये आतंकी इन्हीं इलाकों में रहकर पूरा करते रहे हैं। लिहाजा सुरक्षा एजेंसियों को इस इलाके में फिर से सक्रिय हुए स्लीपर सेल या फिर आतंकियों के सफाए की भी जरूरत है।
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इलाके में दशकों बाद गोलियों की गूंज से दहशत में लोग
शशिकांत खजूरिया
बिलावर। बिलावर के लोहाई मल्हार के इलाके तीन दशक के बाद गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठे हैं। इससे लोगों में दहशत है। बदनोता, किंडली के इलाके एक समय पर आतंकी रूट से सटे होने के चलते उनके लिए सुरक्षित रहे हैं।
अब एक बार फिर आतंकियों ने अपनी मौजूदगी इन इलाकों में दर्ज करवा दी है। इससे इलाके के लोग दहशत में हैं। बदनोता का इलाका भौगोलिक रूप से बनी और उधमपुर से सटा हुआ है। ऐसे में आतंकी पूर्व में इन इलाकों का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय सीमा से घुसपैठ के बाद लोहाई मल्हार के इलाके में रहने और इसके बाद घाटी का रुख करने के लिए करते रहे।
नब्बे के दशक के बाद आतंकी संगठनों ने लोहाई मल्हार के युवाओं की भर्ती करने से लेकर इस इलाके को आतंक के गढ़ के रूप में तैयार करने का प्रयास किया। इसी तरह से बनी के लोआंग इलाके को भी उसी समय आतंकियों ने सक्रिय किया। अब लगभग 35 साल बाद पाकिस्तान की साजिश इन इलाकों में आतंक को फिर जिंदा करने की है। कठुआ पुलिस को दो साल पहले भी एक बड़ी कामयाबी मिली थी। जब मलाड के एक आतंकी से पुलिस ने इलाके में असलहा और 20 हजार रुपये बरामद किए थे। क्षेत्र के लोगों के अनुसार इलाके में आतंकी और इनके मददगारों का सफाया किया जाना जरूरी है ताकि एक बार फिर इस इलाके में शांति बहाल हो सके।