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Jammu News: रियासी और अखनूर में बढ़ रहे इंजियोइडिमा के मरीज

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रियासी और अखनूर में बढ़ रहे इंजियोइडिमा के मरीज
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रोकथाम के लिए पीजीआई के विशेषज्ञों ने गर्भावस्था में बच्चे के जीन की जांच करवाने की सलाह दी
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। दुनिया में दुलर्भ बीमारी माने जाने वाली इंजियोइडिमा के मरीजों की संख्या जिला रियासी और अखनूर के कई गांवों में बढ़ रही है। यह मुख्य रूप से जेनेटिव खराब जीन से जुड़ी बीमारी है। इसमें शरीर में खारिश के साथ सूजन सामान्य तौर पर आती है। आमतौर पर लोग इसे एलर्जी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कई बार गले या शरीर के अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों में असामान्य सूजन आ जाने से सांस रुक जाती है, जिससे मरीज की मौत हो जाती है। पीजीआई चंडीगढ़ में हुई जांच में रियासी जिले के कई लोगों में इस बीमारी की पुष्टि हो चुकी है। पीजीआई के विशेषज्ञों ने इस बीमारी की रोकथाम के लिए गर्भावस्था में तीन माह के पल रहे बच्चे के जीन की जांच करवाने की सलाह दी है, ताकि खराब जीन वाले बच्चे का नियमों के तहत गर्भपात कराया जा सके। बीमारी को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है, जिससे बीमारी जल्द पकड़ में आकर उपचार को बढ़ावा दिया जा सके।
अखनूर निवासी धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि उनकी पत्नी को दिसंबर 2021 में एलर्जी से जुड़े लक्षण मिले थे, लेकिन जांच में उसके इंजियोइडिमा से पीड़ित होने की पुष्टि हुई। पत्नी के अन्य परिवार के सदस्यों में उनकी माता और बहनों में भी इसकी पुष्टि हुई। सभी रियासी जिले के सीला गांव में रहते हैं। गांव के अन्य कुछ लोग भी इससे पीड़ित हैं। धर्मेंद्र ने बताया कि अखनूर के कई क्षेत्रों से भी इंजियोइडिमा के पीड़ित उनके संपर्क में आए, जिनकी पीजीआई में जांच में उक्त बीमारी की पुष्टि हुई। इसमें सोगल क्षेत्र से चार सैंपल पॉजिटिव मिले। इसी तरह कठाड़, जेडी, त्रुजिया से भी पीड़ित मिले हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को मुख्य स्वास्थ्य केंद्रों में इंजियोइडिमा के जांच स्तर को बढ़ाना चाहिए।
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इस बीमारी के लिए देश का रेफरल सेंटन बनाए गए पीजीआई के इम्यूनोडिफिशिएंसी क्लीनिक के डॉ. अंकुर अवस्थी ने बताया कि देश के अलग अलग हिस्सों में अब तक 500 के करीब इंजियोइडिमा के मरीज चिह्नित हुए हैं। पीजीआई की टीम ने मार्च 2022 में रियासी के उक्त गांव में लक्षण के आधार पर अलग अलग परिवारों के 25 लोगों के डीएनए जांच के लिए खून के नमूने लिए थे, जिसमें 20 मामलों में इंजियोइडिमा की पुष्टि हुई थी। इसके बाद भी अन्य कुछ क्षेत्रों से पीड़ितों के मिलने की सूचना है। इससे उन क्षेत्रों में इस बीमारी का खतरा बढ़ा है। इसके लिए शोध करवाने की तैयारी की जा रही है। बीमारी के प्रारंभिक लक्षणों का सी1 और सी 4 टेस्ट में पुष्टि होती है। इसमें हफ्ते में तीन बार या नियमित तौर पर एलर्जी हो सकती है। मां से बच्चे में संक्रमण होने का खतरा 50 प्रतिशत तक होता है, जिससे गर्भावस्था के दौरान जांच करवाकर बच्चे को होने वाली इस बीमारी से रोका जा सकता है। ऐसे मामलों में नियमों के अनुसार गर्भपात करवाया जा सकता है। एसएमजीएस अस्पताल के त्वचा विभाग के एचओडी डॉ. देवराज डोगरा के अनुसार उनके पास इंजियोइडिमा के सामान्य मरीज कई बार आए हैं, लेकिन गंभीर मरीज जीएमसी में ही गए हैं।
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ताजा कोई सर्वे नहीं हुआ-सीएमओ
सीएमओ रियासी डॉ. रवींद्र मन्हास के अनुसार उनके संज्ञान में जिले में इंजियोइडिमा बीमारी का ताजा कोई सर्वे नहीं किया गया है। पीजीआई की टीम ने कुछ माह पहले अखनूर से सटे इलाकों में मरीजों की जांच की थी, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई सर्वे नहीं कराया गया है और न ही उनकी जानकारी में ऐसे मामले हैं।
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