जम्मू। संभाग में रबी फसलों का सीजन सिर पर है। बुआई का समय है। इसके लिए सबसे जरूरी डीएपी खाद है, जो इस समय कहीं पर उपलब्ध नहीं है। अगले 10 दिन तक गेहूं की बुआई का पीक टाइम है, लेकिन खाद उपलब्ध न होने की वजह से किसान बुआई नहीं कर पा रहे। आलम यह है कि पूरे संभाग में कहीं पर भी खाद नहीं है। जानकारी के अनुसार जम्मू संभाग में 2 लाख हेक्टेयर जमीन पर गेहूं की बुआई की जानी है, जबकि 50 हजार हेक्टेयर पर अन्य रबी फसलें लगनी हैं। इनमें आलू, दलहन शामिल हैं। प्रति कनाल किसानों को 5 से 7 किलो डीएपी खाद की जरूरत रहती है। इस तरह से एक हेक्टेयर के लिए करीब एक क्विंटल खाद की जरूरत होती है। कुल मिलाकर 2 लाख क्विंटल खाद की जरूरत किसानों को है, लेकिन इस समय कहीं पर भी खाद उपलब्ध नहीं है।
कृषि विवि के रिसर्च विभाग के पूर्व निदेशक जेपी शर्मा का कहना है कि गेहूं की बुआई के लिए डीएपी खाद बहुत जरूरी होती है। गेहूं के अंकुरित होने और अच्छी पैदावार के लिए इसका होना जरूरी है। इस खाद से जमीन में गर्माहट पैदा होती है, जो गेहूं को बाहर निकलने में मदद करता है।
किसान नेता एवं उन्नत किसान कुलभूषण खजूरिया का कहना है कि 1 से 15 नवंबर तक गेहूं की बुुआई का पीक समय होता है। उक्त समय की अवधि में बुुआई होना जरूरी होता है, लेकिन कहीं पर भी डीएपी खाद नहीं है। इसकी वजह से किसानों को परेशान होना पड़ रहा है। हालांकि सभी केंद्रों पर बीज पहुंच चुका है, लेकिन किसान खाली बीज लेकर क्या करेंगे, जब तक खाद नहीं होगी। सही समय पर यदि बुुआई नहीं हुई तो इसका असर पैदावार पर पड़ेगा।
जम्मू संभाग की सबसे मुख्य फसल है गेहूं
जानकारी के अनुसार जम्मू संभाग में गेहूं ही एक मात्र ऐसी फसल है, जो हर जिले में लगती है। करीब 2 लाख हेक्टेयर में यह फसल लगती है। मुख्य रूप से जम्मू, सांबा और कठुआ जिले में लगाई जाती है।
एक-दो दिन में आ जाएगी खाद
कंपनियों में खाद के दाम तय न होने को लेकर कुछ परेशानी थी। इसकी वजह से खाद नहीं आ रही थी। एक से दो दिन में 7 हजार मीट्रिक टन खाद के तीन रैक जम्मू पहुंच रहे हैं। इसके बाद जितनी जरूरत होगी, उसके हिसाब से खाद आती रहेगी। जल्द ही किसानों को राहत मिलेगी।
-अटल डुल्लू, वित्त आयुक्त, कृषि उत्पादन विभाग