जम्मू। जम्मू-कश्मीर के धावकों को अभ्यास के दौरान चोटिल या घुटने के दर्द से परेशान नहीं होना पड़ेगा। धावक अब मिट्टी के मैदान की बजाय सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक पर दौड़ेंगे। जम्मू विश्वविद्यालय में आठ लेन के ट्रैक का काम पूरा हो चुका है। पांच करोड़ की लागत से बना यह प्रदेश का दूसरा और जम्मू संभाग का पहला सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक है।
बुनियादी सुविधाओं की कमी हमेशा प्रदेश के खिलाड़ियों के प्रदर्शन में दिखती थी, लेकिन अब जम्मू-कश्मीर की धरती से भी मिल्खा सिंह और पीटी ऊषा जैसे खिलाड़ी तैयार होंगे। खिलाड़ी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप की तैयारी सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक पर करेंगे। जम्मू विश्वविद्यालय में पांच करोड़ की लागत से 400 मीटर ट्रैक बना है। खेल ढांचे का निर्माण करने वाली कंपनी सिंकोर्ट्स ने इसका निर्माण किया है। इस ट्रैक पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की चैंपियनशिप हो सकेगी। सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक में तीन लेयर की ईपीडीएम पड़ी है। ईपीडीएम खिलाड़ियों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाती है। ट्रैक पर दौड़ते समय धावक के घुटने पर जोर नहीं पड़ता, जिससे उसके चोटिल होने की संभावना कम हो जाती है। प्रदेश में पुलावमा जिले के अवंतीपोरा में सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक है। जम्मू विवि में बने ट्रैक पर एक साथ आठ धावक दौड़ लगा सकेंगे।
नॉर्थ जोन एथलेटिक चैंपियनशिप में 400 मीटर में स्वर्ण पदक विजेता अबरार चौधरी ने कहा कि बुनियादी सुविधाएं न होने से खिलाड़ियों को अन्य राज्यों का रुख करना पड़ता था, लेकिन अब जम्मू में सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक बनने से वह यहां पर ही अभ्यास कर चैंपियनशिप की तैयारी कर सकेंगे। इससे प्रतिभाएं और निखरेंगी। युवा एथलेटिक खेलों की तरफ आकर्षित होंगे। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक न होने के कारण मुझे भी हरियाणा में प्रशिक्षण लेना पड़ रहा है।