जम्मू। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ड्रोन से ड्रग्स और हथियारों की तस्करी को अंजाम देने के लिए पाकिस्तान साजिश के तीन मंसूबों से घुसपैठ करवा रहा है। ड्रोन को रूट की रेकी के लिए भेजा जाता है। डमी ड्रोन (बिना खेप के) भेजकर सुरक्षा ग्रिड को चकमा दिया जाता और फिर मौका पाकर ड्रग्स या हथियारों की खेप को झाड़ियों के झुरमुट में गिराकर स्लीपर सेल को ड्रॉपिंग की इत्तला दी जाती है। आरएस पुरा के सुचेतगढ़ से बरामद हथियारों की खेप भेजने का क्रम भी ऐसा ही था। जम्मू जिले में हथियार गिराने का शक न हो, इसके लिए सीमा पार से सांबा जिले में भी ड्रोन भेजा गया।
आंतरिक सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार ड्रोन के हथकंडे पर नकेल कसने के लिए बहुस्तरीय काम चल रहा है, लेकिन अभी तक इसमें कामयाबी नहीं मिल पाई है। ज्यादातर मौकों पर पाकिस्तान से आने वाले ड्रोन या तो रेकी करने आते हैं या फिर सुरक्षा बलों को चकमा देने के लिए। बिना खेप के घुसपैठ करने वाले ड्रोन जानबूझ कर ऐसे समय और ऊंचाई पर भेजे जाते हैं, जिसकी घुसपैठ का इस पार पता भी चल जाए। बॉर्डर पर पाकिस्तानी ड्रोन की गतिविधियों पर शोध कर रहे केंद्रीय विश्वविद्यालय में आंतरिक सुरक्षा अध्ययन विभाग के एचओडी डॉ. जे जगन्नाथन का कहना है कि पाकिस्तान से भेजे जा रहे ड्रोन में कई बार डमी ड्रोन होते हैं, जिनका मकसद ड्रोन से तस्करी की असल साजिश से सुरक्षा बलों का ध्यान भटकाना होता है।