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किसानों व गांवों का नक्शा बदलने के लिए एक हजार पैक्स गठित होंगे: शाह

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जम्मू। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू को 1960 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का तोहफा दिया। जम्मू में सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने तथा छिन्न भिन्न हो चुकी सहकारिता संस्थाओं को पुनर्जीवित करने के लिए एक हजार प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) के गठन की घोषणा की। इससे किसानों के साथ गांवों का नक्शा भी बदलेगा।
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कन्वेंशन सेंटर में आयोजित समारोह में उन्होंने कहा कि तीन परिवारों के शासन ने जम्मू-कश्मीर को हमेशा विकास से महरूम रखा। इन्होंने विकास में अन्य राज्यों की तुलना में प्रदेश को हजारों किलोमीटर पीछे छोड़ दिया। इनके शासनकाल में 42 हजार लोग आतंकवाद की भेंट चढ़ गए पर किसी के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। आज आतंकवाद पर सुरक्षा बलों का संपूर्ण वर्चस्व है। जिस राज्य में शांति और सुरक्षा नहीं होगी वहां निवेश कैसे आएगा। पहले हड़ताल का रोजाना एलान होता था। यदि हमारे देश से नहीं होता था तो पड़ोसी मुल्क से। आज हड़ताल करने की न तो किसी की हिम्मत है और न ही कोई साहस कर सकता है। 2014 के बाद मोदी सरकार ने सब राज्यों को बराबर लाने का प्रयास किया और उस दिशा में हम तेजी से बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि तीन परिवारों ने अपने शासन में विकास की बजाय आतंकवाद व अलगाववाद को बढ़ाया। इनसे हिसाब मांगा जाना चाहिए। इनके बच्चे तो इंग्लैंड में पढ़े लेकिन आतंकवाद की भेंट 42 हजार नागरिक चढ़ गए। पत्थरबाजी बीते दिनों की बात हो गई क्योंकि सरकार में बैठे पत्थरबाजी करवाने वालों के दिन लद गए। अब इसे रोकने वाले बैठे हैं। अब न तो जुलूस निकलता है और न पत्थरबाजी होती है। आतंकवाद की पूरी चेन को खत्म करने की दिशा में काम हो रहा है। प्रशासन में बैठे लोगों को भी खोजकर उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। आज पुलिस को दहशतगर्दों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए किसी से पूछने की जरूरत नहीं है। उन्हें पूरी छूट है। हर मुठभेड़ के दौरान आतंकियों को समर्पण के कई मौके दिए जाते हैं, लेकिन दूसरी ओर से गोली आती है तो जवाबी कार्रवाई करनी पड़ती है। आज आतंकवाद में 56 फीसदी व सुरक्षाबलों की मौत में 84 प्रतिशत की कमी आई है।
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कश्मीरियत का हवाला देने वालों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि मोदी सरकार ने कश्मीरी के साथ ही डोगरी व हिंदी को मान्यता दी। तीन परिवारों को डर था कि यदि लोग पढ़ना लिखना जान जाएंगे तो उनसे हिसाब मांगने लगेंगे। इसलिए उन्होंने इसे दबाए रखा। उन्होंने विश्वास दिलाया कि न केवल आतंकवाद व अलगाववाद को खत्म किया जाएगा बल्कि विकास में भी अन्य राज्यों की बराबरी में इसे लाया जाएगा। कहा कि प्रधानमंत्री विकास पैकेज के तहत 80 हजार करोड़ की लागत से 65 परियोजनाओं पर काम चल रहा है। शाह ने कहा कि आज जम्मू-कश्मीर में लोगों के घरों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति होती है और ये बहुत बड़ा परिवर्तन है। जब जनता परिवर्तन का स्वागत करती है तभी लोकतंत्र मजबूत होता है। जिन तीन परिवारों ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद, पिछड़ापन और विकास की जगह अलगाववाद की राजनीति को बढ़ावा देने का काम किया, उन्हें पहचानने की आवश्यकता है। इस अवसर पर उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और केंद्रीय गृह सचिव सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
कई परियोजनाओं का शिलान्यास किया, कश्मीर को भी मिलेगा तोहफा
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने जम्मू में 1960 करोड़ रुपये की कुल 263 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास किया। इनमें 500 करोड़ रुपये की लागत से 82 परियोजनाओं का लोकार्पण और 1460 करोड़ की लागत वाली 181 परियोजनाओं का शिलान्यास शामिल है। शहरी विकास विभाग की 31 करोड़ रुपये की 14 परियोजनाएं, 402 करोड़ रुपये की लागत से 48 सड़कों का निर्माण, 168 करोड़ रुपये की लागत से जल जीवन मिशन और 1112 करोड़ रुपये की लागत से 41 योजनाएं जम्मू के हर गांव को सड़क से जोड़ने के लिए कई कार्यक्रम शुरू हुए हैं। जन आरोग्य योजना के लगभग 77 लाख कार्ड दिए जा चुके हैं। सूचना प्रौद्योगिकी की 250 नागरिक सुविधाओं को ऑनलाइन किया। सौभाग्य योजना के तहत 8.57 लाख ऐसे घरों में जहां आजादी के 75 सालों तक बिजली नहीं पहुंची थी, आज बिजली पहुंचाने का काम प्रधानमंत्री ने किया है। विकास की ये यात्रा उन लोगों को जवाब है जो कहते थे कि 370 हटने से क्या हुआ है। जो विकास करना चाहते हैं वो सिर्फ विकास में श्रद्धा रखते हैं और जो भ्रष्टाचार करना चाहते हैं उन्हें विकास से कोई लेना-देना नहीं होता है। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि जम्मू में प्रधानमंत्री विकास पैकेज के अंतर्गत 80 हजार करोड़ से लगभग 63 परियोजनाएं बनाई गई है। हाइड्रो पावर में 4287 करोड़ की लागत से कीरू परियोजना का काम प्रगति पर है। 4633 करोड़ रुपये की कार योजना, 2793 करोड़ की शाहपुर कुंडी और 11908 करोड़ की लागत वाली पुंछ बिजली परियोजना पर काम जल्द शुरू होगा। गुड गवर्नेंस इंडेक्स के दूसरे चरण की रिपोर्ट जारी की जिसमें सभी जिलों की प्रगति सूचकांक का जिक्र है।
मुखर्जी व प्रेमनाथ डोगरा को देश नहीं भूल सकता
शाह ने कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी और प्रेमनाथ डोगरा को देश कभी भूल नहीं सकता क्योंकि अगर ये दोनों व्यक्ति ना होते तो जम्मू-कश्मीर का भारत के साथ कभी स्थायी जुड़ाव नहीं हो सकता था। अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के लिए सबसे पहला बलिदान श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने दिया था और प्रेमनाथ डोगरा की अगुवाई में चले आंदोलन ने यहां की सरकार को झंझोड़कर रख दिया था। इन दोनों महान विभूतियों ने जिस आंदोलन का नेतृत्व किया था उसे लॉजिकल अंत तक ले जाने का काम देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया है।
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