जम्मू। स्वास्थ्य निदेशालय ने दो माह पूर्व गांधीनगर अस्पताल जम्मू और जिला अस्पताल उधमपुर में सलाहकार डॉक्टरों की इवनिंग ओपीडी रोस्टर ड्यूटी शुरू करने की पहल की थी। इसमें रात 7 से 10 बजे तक स्त्री रोग, हड्डी, नाक-कान, मेडिसिन, सर्जरी आदि विशेषज्ञ उपलब्ध रहते हैं। इसका उद्देश्य खासतौर पर दोपहर के बाद अस्पतालों में आने वाले मरीजों को सलाहकारों की देखरेख में उचित चिकित्सा सुविधाएं मुहैया करवाना है, लेकिन दो अस्पतालों को छोड़कर संभाग के अन्य आठ जिला अस्पतालों में यह पहल शुरू नहीं हो पाई। नतीजतन आज भी दोपहर बाद जिला स्तर से मरीजों के रेफर मामलों का आना जारी है।
शहर के प्रमुख एसएमजीएस अस्पताल जम्मू की बात करें तो यहां स्त्री रोग विभाग में अगस्त 2022 में 171 रेफर मरीज पहुंचे हैं। अगर इन मरीजों में 60 से 70 प्रतिशत मरीज योग्य भी ले लें, तब भी 30 से 40 प्रतिशत मरीज ऐसे हैं जिन्हें सीधे रेफर कर दिया गया है। इसका मुख्य कारण जिला अस्पतालों में दोपहर के बाद वरिष्ठ सलाहकार डॉक्टरों की उपलब्धता न होना है। इसी तरह अन्य एसोसिएटेड अस्पतालों में भी जिला स्तर से रेफर मामलों का आना जारी है। माना जाता है कि ड्यूटी के बाद अधिकांश सलाहकार डॉक्टर निजी प्रैक्टिस में व्यस्त रहते हैं और ये अधिकांश समय शाम का होता है, जिससे अस्पतालों में कनिष्ठ डॉक्टर ही मिलते हैं। इसमें मरीजों के बेवजह अधिक टेस्ट करवाने के साथ रेफर मामलों पर रोक नहीं लग पा रही है। स्वास्थ्य निदेशालय जम्मू ने दावा किया था कि जल्द ही संभाग के सभी अस्पतालों में इवनिंग ओपीडी शुरू कर दी जाएगी, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया है। इवनिंग ओपीडी से मरीज को सीधे वरिष्ठ सलाहकार से उपचार मिलता है, जिसमें सीमित टेस्ट के साथ उसे जल्दी उपचार देकर घर भेज दिया जाता है।
कोट
संभाग के सभी दस जिला अस्पतालों में इवनिंग ओपीडी शुरू करने पर काम किया जा रहा है। डॉक्टरों की उपलब्धता के मुताबिक रोस्टर ड्यूटी शुरू की जाएगी।
-डॉ. सलीम उर रहमान, स्वास्थ्य निदेशक जम्मू