जम्मू। उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर अध्यात्म व ज्ञान की भूमि रही है। विज्ञान और आध्यात्मिकता का ऊर्जा क्षेत्र रहा है। सभी को राष्ट्र निर्माण के लिए सामूहिक रूप से योगदान करना चाहिए। वे श्रीमद् जगद्गुरु शारदा सर्वज्ञ पीठम के एकादश सम्मान समारोह और हिंदी कश्मीरी संगम में बोल रहे थे। इस अवसर पर श्रीमद् जगद्गुरु शारदा सर्वज्ञ पीठम के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अमृतानंद देव तीर्थ महाराज उपस्थित थे।
श्रीनगर के कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित समारोह में आयोजकों और सम्मानित प्रतिष्ठित हस्तियों को बधाई देते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि इस प्रयास ने विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को एक साझा मंच पर लाया है। इस अवसर पर कश्मीर में आदि शंकराचार्य, सूफि यों और संतों की भूमिका व प्रभाव और शारदा पीठ के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का समापन भी हुआ। उपराज्यपाल ने राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता डॉ बीना बुडकी द्वारा डॉ प्रेमलता की कश्मीर और शारदा पीठ का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व और जिंदगी को तलाशते किन्नर हित विभिन्न प्रकाशनों का विमोचन किया। इस अवसर पर कश्मीर में आदि शंकराचार्य, सूफि यों और संतों की भूमिका व प्रभाव और शारदा पीठ के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर आयोजित अंतराज़्ष्ट्रीय सम्मेलन का समापन भी हुआ। हिंदी कश्मीरी संगम की डॉ बीना बुडकी और सर्वज्ञ शारदा पीठ के निदेशक डॉ राजा लंगर ने शारदा सर्वज्ञ पीठ और हिंदी कश्मीरी संगम के उद्देश्यों और उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर उपस्थित अन्य लोगों में प्रमुख थे पद्मश्री विश्वमूर्ति शास्त्री, सतीश चंद्र-अध्यक्ष जेकेपीएससी, वसुधा मिश्रा-सचिव यूपीएससी, प्रो. नजीर ए गनई- वीसी स्कास्ट, प्रो. अकबर मसूद-वीसी बाबा गुलाम शाह विश्वविद्यालय, प्रो. एसएस सारंगदेवोत-वीसी जनार्दन राय नगर राजस्थान विद्यापीठ, प्रो. रमेश कुमार पांडे-पूर्व वीसी एसएलबीएस राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, डा. करुणा सागर, राम नारायण द्विवेदी-महामंत्री काशी विद्वत परिषद, डॉ रत्नाकर शर्मा-विभागाध्यक्ष सर्जरी जीएमसी जम्मू, स्विट्जरलैंड के शिक्षाविद् और लेखक डॉ रूबी बख्शी खुर्दी, अमेरिका से डॉ अखिलेश शर्मा और काशी विद्वत परिषद के सदस्य उपस्थित थे।