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आजाद के जाने के बाद रसूल असमंजस में

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जम्मू। जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता सहित सभी पदों से इस्तीफा देकर सियासी दलों को हैरत में डाल दिया है। अचानक हुए इस राजनीतिक घटनाक्रम से उनके करीबी परेशान हैं। हाल ही में जम्मू कश्मीर में नवनियुक्त अध्यक्ष व उनकी करीबी विकार रसूल भी असमंजस में हैं कि इधर जाएं या उधर। यानी आजाद का साथ दें या फिर हाईकमान की। शुक्रवार को आजाद के इस्तीफा देने के बाद उनके समर्थन में प्रदेश के कई वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ दी। लेकिन रसूल की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। माना जाता है कि आजाद की सिफारिश से ही रसूल को अध्यक्ष पद दिया गया है।
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अध्यक्ष बनने के बाद रसूल ने गत दिनों कश्मीर के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर उन्हें अपने पक्ष में करने की कोशिश की। उन्होंने दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी, महासचिव वेणुगोपाल से मुलाकात कर प्रदेश कैडर को संकेत दिया था कि पार्टी हाई कमान उनके साथ है। लेकिन पार्टी के अहम पदों पर जगह न मिलने से अंदर खाते रसूल के खिलाफ विरोध स्वर उभर रहे हैं। ऐसे में पार्टी स्तर पर आजाद का सीधे समर्थन नहीं मिलने से उनके लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। अमर उजाला ने शुक्रवार को रसूल से फोन पर कई बार बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया और अधिकांश समय मोबाइल स्विच आफ रखा।
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30 अगस्त को पाटिल और रसूल जम्मू आएंगे
जम्मू। शहीदी चौक स्थित प्रदेश कांग्रेस समिति के मुख्यालय में शुक्रवार को हुई तैयारी बैठक में 30 अगस्त को जम्मू कश्मीर मामलों की प्रभारी रजनी पाटिल और नवनियुक्त अध्यक्ष विकार रसूल के स्वागत की तैयारियों की समीक्षा की गई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए कार्यकारी अध्यक्ष रमण भल्ला ने कहा कि कांग्रेस पार्टी को जनकल्याण के दुश्मन और भाजपा की जनविरोधी नीतियों खिलाफ एकजुट होना है। जम्मू कश्मीर में हजारों अस्थायी कर्मचारी अपनी मांगों के लिए सड़क पर हैं। लेकिन प्रशासन को कोई लेना देना नहीं है।
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