जम्मू। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद के जम्मू कश्मीर प्रदेश प्रचार समिति के चेयरमैन पद से इस्तीफा देने के बाद पार्टी में उठा पटक जारी है। अब पूर्व मंत्री जीएम सरूरी ने प्रचार समिति के संयोजक पद से और प्रदेश चुनाव समिति में शामिल चौधरी मोहम्मद अकरम ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। माना जा रहा है कि आजाद समर्थक नेता इस्तीफे देकर हाई कमान पर बदलाव के लिए दबाव बना रहे हैं। जिससे आगामी दिनों में कई और नेता भी विभिन्न समितियों से सदस्यता छोड़ सकते हैं। इससे पहले दक्षिण कश्मीर के शांगस और देवसर से पूर्व विधायक गुलजार अहमद वानी, मोहम्मद अमीन भट्ट और उत्तरी कश्मीर के सोपोर से पूर्व विधायक हाजी अब्दुल रशीद डार ने इस्तीफे दिए थे।
प्रदेश कांग्रेस में लगातार वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी से पार्टी को झटका लगा है। जीएम सरूरी इंद्रवाल निर्वाचन क्षेत्र से 2002 से 2018 तक विधायक रहे हैं। हाल ही में एआईसीसी की ओर से प्रदेश प्रचार समिति में उन्हें संयोजक पद पर बिठाया गया था। इसी तरह मोहम्मद अकरम चौधरी सुरनकोट निर्वाचन क्षेत्र से विधायक रहे हैं। अकरम ने इस्तीफे की पुष्टि करते हुए कहा कि प्रदेश अध्यक्ष का मामला अलग था, लेकिन मौजूदा प्रदेश समितियां बनाने की कोई जरूरत नहीं थी। नई समितियों के गठन के लिए वरिष्ठ नेताओं से पूछा नहीं गया। इन समितियों में कई कनिष्ठ नेताओं को बड़े पद दे दिए गए हैं, जबकि वरिष्ठ नेताओं को नजरअंदाज कर दिया गया। हाईकमान को गुलाम नबी आजाद को मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित करना चाहिए। अब तक छह पूर्व विधायक इस्तीफे दे चुके हैं।
आजाद का अभी इस्तीफा नहीं मिला : पाटिल
एआईसीसी की जम्मू-कश्मीर मामलों की प्रभारी रजनी पाटिल ने कहा कि गुलाम नबी आजाद का अभी उन्हें इस्तीफा नहीं मिला है। हमने खबरों में यह सुना है। आजाद दिल्ली की राजनीतिक मामलों सहित अन्य समितियों में शामिल हैं। हो सकता है उन्हें प्रदेश समिति में रहना पसंद नहीं हो। हमने सोचा था कि आजाद जम्मू कश्मीर में उनके सर्वोच्च नेता हैं और उनके नेतृत्व में प्रचार समिति को उतारा जाए। हमने तभी उन्हें प्रदेश समिति में रखा है। उन्हें किसी तरह से अपमानित करने की कोई मंशा नहीं थी। इससे पहले भी सेफुदोन सोज और जीए मीर की अध्यक्षता में प्रदेश समिति में आजाद प्रचार समिति के अध्यक्ष रहे हैं। उन्हें अगर ठीक नहीं लगता है तो हम उनसे बात करेंगे।