जम्मू। प्रदेश की जेलों में कई कैदी ऐसे हैं जो खुद ही बाहर नहीं आने चाहते। सूत्रों के मुताबिक ये कैदी छोटा-मोटा अपराध कर जेलों में आराम फरमा रहे हैं और यहीं से आपराधिक गतिविधियां चला रहे हैं। सांठगांठ कर जेल से बाहर नहीं आ रहे। जेलों को सुरक्षित ठिकाना बनाकर रहने वाले ऐसे कैदियों को अब बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। इसके लिए जेल विभाग ऐसे कैदियों की पहचान कर रहा है। पता चला है कि 80 से 100 कैदियों पर जेलों में पनाह लेने का शक है।
इसके अलावा जेल विभाग उन कैदियों की भी पहचान कर रहा है, जो छोटे अपराध में बंद हैं और कानूनी मदद के अभाव में रिहा नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे कैदियों की पहचान करके भी उन्हें कानूनी मदद दिलाई जाएगी। बता दें, जम्मू कश्मीर में छोटी-बड़ी मिलाकर कुल 16 जेलें हैं। इन जेलों में सजायाफ्ता कैदियों की संख्या 186 है, जबकि अंडर ट्रायल कैदियों की संख्या 4532 है।
नागर पर हमले की साजिश जेल से रची गई थी
कारोबारी नागर सिंह के घर पर गोली चलाने की साजिश कोट भलवाल जेल में ही रची गई थी। इसके अलावा जेल में बंद कुछ कैदियों ने सीमा पार तक अपना नेटवर्क बना लिया है, जो वहां से हथियारों और ड्रग्स की तस्करी कर रहे हैं।
कोट
छोटे-मोटे अपराध वाले दो तरह के कैदी जेल में हैं। एक वो जो कानूनी मदद की वजह से बाहर नहीं निकल पा रहे। दूसरे वो हैं, जो खुद बाहर नहीं आना चाहते। दोनों की ही पहचान करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। जेल का गलत इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा। जेल में स्टाफ की कमी को दूर किया जाएगा और जेलों को साफ सुथरे तरीक से चलाया जाएगा।
-एच के लोहिया, डीजी, जेल विभाग
आईपीसी की धारा के तहत जेल में बंद अंडर ट्रायल कैदी
हत्या 1229
जानलेवा हमला 79
दुष्कर्म 604
पाक्सो 18
अप्राकृतिक अपराध 2
अपहरण या भगाना 26
डकैती 3
सेंधमारी 1
चोरी 121
विश्वासघात 16
धोखाधड़ी 9
दहेज उत्पीड़न में मौत 43
महिलाओं संबंधी अपराध 39
अन्य अपराध 90
विशेष एवं स्थानीय कानून के तहत
आर्म एक्ट 304
एनडीपीएस 1442
गैर कानून गतिविधयों में शामिल 410
बम विस्फोट 70
भ्रष्टाचार 26
कुल 4532
आईपीसी धारा के तहत सजा पा चुके कैदी
हत्या 95
जानलेवा हमला 6
चोरी 4
विश्वासघात 1
अन्य 8
स्थानीय एवं विशेष कानून
आर्म एक्ट 3
एनडीपीएस 27
टाडा, बम विस्फोट 5
अन्य 2
कुल 186