जम्मू। सौंदर्य और पर्यटन के लिहाज से भरपूर स्त्रोत होने के बावजूद नीतिगत खामियों की वजह से कश्मीर संभाग का गुरेज और जम्मू संभाग का किश्तवाड़ विकास और पर्यटन में पिछड़ गया है। पूर्ववर्ती सरकारों ने नीतिगत पक्षपात करते हुए पहलगाम और गुलमर्ग की तरह गुरेज और किश्तवाड़ के विकास की अनदेखी की है।
केंद्र सरकार ने संसद में गत माह जानकारी दी कि जम्मू-कश्मीर में 2022 के पहले छह महीनों में एक करोड़ से ज्यादा पर्यटक पहुंचे। इनमें से ज्यादातर पर्यटक पहलगाम और गुलमर्ग में ही पहुंचे। सूत्रों के अनुसार गुरेज और किश्तवाड़ के पर्यटन में पिछड़ने का मुख्य कारण वहां पर ग्रिड से बिजली की कनेक्टिविटी नहीं होना है।
बांदीपोरा से गुरेज तक 33 केवी लाइन का प्रस्ताव 2015 में दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण ज्योति योजना के तहत मंजूर हुआ था, लेकिन पूर्ववर्ती सरकार केपीडीसीएल के माध्यम से लाइन बिछाने में नाकाम रही। यहां तक कि गुरेज घाटी में बिजली की आपूर्ति को सुनिश्चित बनाने के लिए 2018 में 160 करोड़ के प्रोजेक्ट की डीपीआर की सिफारिश की थी लेकिन अभी तक परियोजना के लिए राशि उपलब्ध नहीं हो पाई।
प्रस्तावित लाइन को राजदान से टॉप तक बिछाने में सर्दी के मौसम में दस से बीस फीट की बर्फ में काम करने की जरूरत है लेकिन बिजली विभाग के पास सर्दी में बर्फबारी के बीच बिजली लाइन को बिछाने के लिए स्त्रोतों की कमी है।
गुरेज में 21 डीजी सेटों के माध्यम से उपभोक्ताओं को केवल पांच से सात घंटे की ही बिजली आपूर्ति हो पा रही है। इस वजह से पर्यटन में यह क्षेत्र पिछड़ गया है।
18 साल से चार ट्रांसमिशन लाइनें नहीं बिछ पाईं
जम्मू संभाग के किश्तवाड़ जिले की हालात भी गुरेज से ज्यादा बेहतर नहीं है। यहां पर पिछले 18 वर्षों से रामबन से खलैनी के मध्य चार ट्रांसमिशन लाइनें बिछाने का काम भी पूरा नहीं हो पाया है। किश्तवाड़ बिजली उत्पादन में प्रदेश का मुख्य केंद्र होने के बावजूद भी यहां पर 140 मेगावाट की बिजली लाइन की जरूरत के बजाय केवल 80 मेगावाट बिजली ट्रांसमिशन की लाइनें ही हैं। वर्तमान सरकार ने गंभीर मुद्दों को केंद्रीय विद्युत मंत्री आरके सिंह के समक्ष उठाया है। मंत्री ने बिजली विभाग के प्रस्ताव के अनुसार 4971 करोड़ की निवेश योजना को भी घोषित किया है।