जम्मू। प्रदेश में अखरोट की दो नई प्रजातियां एसजेपीडब्ल्यू-1 और जेडब्ल्यूएसपी-6 भी प्रदेश में उगाई जाएंगी। दोनों किस्मों में स्कॉस्ट जम्मू में शोध किया गया है। पुरानी किस्मों के अखरोट के बजाय नई प्रजातियों की पैदावार ज्यादा है। साथ ही अखरोट का आकार बड़ा है। इसमें गिरी की मात्रा भी ज्यादा पाई गई है। सौ ग्राम अखरोट में 53 ग्राम गिरी पाई गई है। हालांकि पहले उगने वाले अखरोटों में सौ ग्राम में गिरी मात्र तीस से 35 ग्राम ही निकल पाती है। दोनों किस्मों को जारी कर दिया गया है।
अगले साल दोनों प्रजातियों के पौधे किसानों को वितरित किए जाएंगे। पौधे जनवरी, फरवरी और मार्च में लगाए जाने हैं। दो साल के बाद पौधा फल देने लगेगा। पहले साल पैदावार कम रहेगी मगर दूसरे साल पैदावार दोगुनी होगी। प्रदेश से अखरोट को बाहरी राज्यों समेत विदेशों में भेजा जाता है।
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प्रदेश में इतनी होती है पैदावार
कश्मीर घाटी में अखरोट 84 हजार हेक्टेयर भूमि में होता है। यहां पर इसकी पैदावार दो लाख 79 हजार एमटी के करीब होती है। इसी तरह जम्मू संभाग में 40 हजार हेक्टेयर में 85 हजार एमटी होती है।
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छिलका फल पकने के बाद होता है अलग
नई किस्म के अखरोट की खास बात यह है कि उसका छिलका फल पकने के बाद अलग होता है। इससे कोहरा समेत बारिश के दौरान होने वाली बीमारियों से बचाव रहता है। हालांकि पुरानी किस्मों के अखरोट के छिलके फल बड़ा होने के बाद अलग हो जाते हैं।
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कोट
नई किस्म के पौधे अगले साल किसानों को मिलेंगे। दो साल में तैयार होगा। इससे किसानों की आय बढ़ेगी। इस पर स्कॉस्ट में ट्रायल किया जा चुका है। यह सफल रहा है। इस साल कलम लगाने का काम बरसात में किया जाएगा। अगले साल से पौधे लगाने का काम होगा।
- डॉ. प्रशांत बख्शी, वरिष्ठ वैज्ञानिक, स्कॉस्ट जम्मू, फल विभाग