map of jammu kashmir and ladakh
- फोटो : अमर उजाला
सरकार ने विकास परियोजनाओं में सरकारी भूमि का प्राथमिकता पर उपयोग करने के निर्देश दिए हैं। ऐसी परियोजनाओं में निजी भूमि तब ही प्रयोग में लाई जाए, जिसमें सरकारी भूमि की अनुपलब्धता या फिजिबिल्टी न हो। ऐसे प्रोजेक्टों में बिना संबंधित प्राधिकरण की अनुमति के निजी भूमि का उपयोग करने वाले अधिकारियों से जवाब तलब के साथ विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
ऐसे कई पुराने मामलों में पाया गया है कि सरकारी भूमि की उपलब्धता के बावजूद परियोजनाओं के लिए निजी भूमि का अधिग्रहण किया गया, जो गंभीर है। इसके साथ विकास परियोजनाओं में निजी भूमि की दरों को पहले ही डीपीआर में शामिल किया जाए। सामान्य प्रशासनिक विभाग के सचिव डॉ. पीयूष सिंगला की ओर से सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि विकास परियोजनाओं में प्राथमिकता में सरकारी भूमि का उपयोग किया जाए। जिन मामलों में निजी भूमि को दान किया जाता है, उसकी दान करने की सभी औपचारिकताएं पूरी की जाएं, ताकि भविष्य में कोई अड़चन न पड़े।
बिना संबंधित प्राधिकरण की अनुमति के बिना कोई भी प्रशासनिक सचिव/एचओडी/संबंधित अधिकारी कोई विकास कार्यों को अंजाम न दें। कई मामलों में बिना प्राधिकरण की अनुमति के विकास कार्यों को करवाया गया है और ऐसे मामलों में सरकारी भूमि होने के बावजूद निजी भूमि को अधिग्रहण किया गया है, जिससे बाद में परियोजनाओं में रुकावटें आई हैं। निजी भूमि को लेकर कई मामले विवाद में रहे हैं। सभी विभाग अपने स्तर पर उन अधिकारियों की सूची तैयार करें, जिन्होंने संबंधित प्राधिकरण की अनुमति के बिना विकास कार्यों में निजी भूमि का अधिग्रहण किया है।