दोबारा एक साथ सुनना चाहते हैं अजान और मंदिर की घंटियों की गूंज: बशीर
स्थानीय निवासी बशीर अहमद ने कहा कि इस प्राचीन मंदिर के निर्माण से यहां के लोग खुश हैं। यहां के लोग दोबारा से एक साथ मस्जिद की अज़ान और मंदिर की घंटियों की गूंज सुनना चाहते हैं। 90 के दशक के बाद यहां से कश्मीरी पंडित चले गए। अब हमारी गुज़ारिश है कि वो दोबारा यहां आएं और इस मंदिर में वैसी ही रौनक हो जैसे पहले हुआ करती थी।
लौट आए धर्मनिरपेक्षता और कश्मीरियत : संजय सराफ
एक कश्मीरी पंडित और राजनेता संजय सराफ ने कहा कि कश्मीर हमेशा से धर्मनिरपेक्षता और कश्मीरियत की मिसाल रहा है और हम चाहते हैं वही माहौल दोबारा आना चाहिए। इस प्राचीन मंदिर को बाबा मंगलेश्वर के नाम से जाना जाता था जो भगवान शिव के अवतार माने जाते हैं। इस इलाके को नमचीबल फ़तेहकदल भी कहा जाता है और कश्मीरी पंडितों की इस इलाके में काफी आबादी हुआ करती थी।
2004 में इसे पंडितों के पलायन के बाद पहली बार खोला गया था और हवन किया गया था। इसमें स्थानीय मुसलमानों ने काफी सहयोग दिया था। कश्मीर में मौजूदा समय में 951 मंदिर हैं, जिसमें से 250 के करीब ठीक हुए हैं और शेष को मरम्मत की जरूरत है। केंद्र सरकार के निर्देशों के चलते मंदिरों के जीर्णोद्धार का कार्य शुरू किया गया है। यह मंदिर पानी के बीचोबीच है और कश्ती में सुबह-सुबह कश्मीरी पंडित मंदिर में बाबा मंगलेश्वर को जल चढ़ाने के लिए जाया करते थे।
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