जम्मू-कश्मीर की सड़कों पर पहली बार आपको ओला, उबर जैसी मोबाइल एप आधारित टैक्सी गाड़ियां दौड़ती नजर आएंगी। यूटी प्रशासन ने व्यावसायिक टैक्सी वाहनों को चलाने की अनुमति प्रदान कर दी है। प्रशासन ने आम लोगों की राय जानने के लिए फाइनल नोटिफिकेशन मंगलवार को जारी कर दिया है। जम्मू-कश्मीर में प्रतिवर्ष लगभग 60 लाख पर्यटक आते हैं। व्यावसायिक गाड़ियां चलने से सैलानियों को बड़ी राहत मिलेगी।
प्रदेश में हर साल बड़ी संख्या में सैलानी आते हैं। ऐसे में लोगों को वाहनों की कमी का सामना करना पड़ता है। यही नहीं मनचाही जगहों पर घूमने जाने के लिए किराए के एवज में मोटी रकम चुकानी पड़ती है। वहीं सैकड़ों लोग वाहनों की कमी के चलते अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पाते हैं। इसे देखते हुए यूटी प्रशासन ने पिछले दिनों सस्ते सफर और घाटी के आखिरी छोर तक पर्यटकों को पहुंचाने के लिए व्यावसायिक टैक्सी वाहनों को चलाने की मंजूरी प्रदान की है।
परिवहन विभाग के अतिरिक्त सचिव राज मोहम्मद मलिक ने बताया कि आम जनता की राय लेने के लिए प्रशासन ने फाइनल नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। सब कुछ सही चला तो जुलाई के अंतिम सप्ताह तक ओला, उबर जैसी मोबाइल ऐप आधारित टैक्सी वाहनों को सड़कों पर चलने की अनुमति मिल जाएगी। अतिरिक्त सचिव ने बताया कि यात्रियों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। नीति में इसका पूरा ख्याल रखा गया है।
प्रदेश में आए बदलाव का दिख रहा असर
अभी तक प्रदेश में ओला, उबर जैसे वाहन नहीं चल रहे थे। अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में आए बदलाव से यहां देश व विदेश से प्रति वर्ष अनुमानित 60 लाख सैलानी आ रहे हैं। इन्हें सुविधाएं मुहैया कराने के लिए प्रशासन ने पहली बार यह निर्णय लिया है। प्रशासन के इस फैसले के बाद ओला, उबर जैसी कंपनियां अब जम्मू से लेकर कश्मीर तक अपने वाहन चला सकेंगी।