जम्मू कश्मीर में भूमिहीन लोगों के लिए पीएमएवाई (जी)/आवास प्लस के तहत लीज के आधार पर 5 मरला भूमि देने का प्रावधान रखा गया है। इसमें राज्य भूमि पर रहने वालों, वन भूमि पर रहने वालों, रख व फार्म भूमि पर रहने वालों, कस्टोडियन भूमि पर कब्जाधारकों, दाछीगाम पार्क के निकट सरकार की ओर से कृषि उद्देश्य के लिए दी गई भूमि (जिसमें निर्माण नहीं है), पीएमएवाई-जी के तहत अन्य श्रेणी में आवास के लिए योग्य लोगों, जिनके पास निर्माण के लिए कोई जगह नहीं है, को लाभ दिया जाएगा।
इसमें पहले 40 और फिर बाद में अतिरिक्त 40 साल तक लीज पर भूमि देने का प्रावधान होगा। संबंधित जिला उपायुक्तों द्वारा ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार की स्थायी प्रतीक्षा सूची 2018-19 के योग्य लोगों को पांच मरला राज्य भूमि लीज के आधार पर देने को प्राथमिकता दी जाएगी।
यह जम्मू कश्मीर लैंड ग्रांट अधिनियम 1960 व रूल्स के तहत दी जाएगी। संबंधित जिलाउपायुक्त लाभार्थियों को पांच मरला भूमि का लाभ देंगे। जम्मू कश्मीर राजस्व विभाग के सचिव डा. पीयूष सिंगला की ओर से जारी एक आदेश में भूमिहीन लोगों को पांच मरला भूमि देने के लिए दिशानिर्देश जारी किए गए हैं।
भूमिहीन मामलों में उन लोगों को लिया जाएगा जो जम्मू कश्मीर में डोमिसाइल है और लाभार्थी व उसके परिवार के किसी सदस्य के नाम पर भूमि नहीं है। इसमें लाभार्थी से प्रत्येक मरला पर 100 रुपये टोकन राशि एकमुश्त प्रीमियम लिया जाएगा और प्रति वर्ष 1 रुपया प्रति मरला ग्राउंड किराया लिया जाएगा जो संबंधित अधिनियम के तहत राहत देता है।
लाभार्थी के कोडल औपचारिकताएं पूरी करने पर 40 वर्ष की लीज को अतिरिक्त 40 वर्ष करने का प्रावधान होगा। अगर लाभार्थी अलाटमेंट के दो साल के भीतर गृह निर्माण नहीं करवा पाया तो लीज रद्द करने का प्रावधान होगा। संबंधित जिलों के ग्रामीण विकास विभाग के सहायक आयुक्त विकास योग्य मामलों का सत्यापन करेंगे।
जिला उपायुक्त ऐसे मामलों को संबंधित तहसीलदार के पास जांच के लिए भेजेंगे। लीज के बाद लाभार्थी को तीन माह के भीतर गृह निर्माण को शुरू करवाना होगा। लीज को विभिन्न मामलों में आगे किसी को देने पर लीज को रद्द करने का प्रावधान होगा।