जम्मू-कश्मीर के मूल निवासी और वर्तमान में प्रवासी भारतीय छह लोगों को काला धन मामले में जारी किए गए नोटिस की चुनौती याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने ब्लैक मनी एंड इंपोजिशन ऑफ टैक्स एक्ट 2015 की याचिका में कहा कि याचिकाकर्ता के पास नोटिस को चुनौती देने के लिए कमिश्नर ऑफ अपील्स का विकल्प खुला है। वे सीधे हाईकोर्ट में नहीं आ सकते।
हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करने के साथ ही कहा कि एक माह में अपील करने पर इन याचिकाकर्ताओं के खिलाफ फिलहाल कोई कार्रवाई न की जाए। याची पक्ष से पेश वरिष्ठ वकील पी चिदंबरम ने दलील देते हुए कहा कि उनके मुवक्किल प्रवासी भारतीय हैं। उन्होंने जो भी पैसा अर्जित किया है, उसका टैक्स संबंधित देश की संस्था लेती है।
ऐसे में उन्हें यहां नोटिस जारी करना कानून सम्मत नहीं। न्यायाधीश अली मोहम्मद माग्रे और मोहम्मद अकरम चौधरी की खंडपीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत याची पक्ष के पास अपील कर दूसरा विकल्प मौजूद है। लिहाजा कमिश्नर ऑफ अपील्स के पास अपील की जाए। इसी वजह से याचिका को खारिज किया जा रहा है।
काला धन देश के लिए गंभीर विषय
याचिका पर सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने कहा कि काले धन का इस्तेमाल राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने के लिए किया जा सकता है। काले धन को टैक्स बचाने के लिए दूसरे देशों में ले जाकर एकत्रित करना देश के लिए गंभीर विषय है।
कोर्ट ने कहा कि केंद्र की ओर से सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर अमल के लिए गठिन स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने भी काले धन की चुनौती से निपटने के तरीके बताए हैं। कोर्ट ने कहा कि जो लोग विदेश में संपत्ति का ब्योरा किसी वजह से अभी तक नहीं बता सके हैं, उनके लिए सरकार ने विकल्प दिया है, जिसमें संपत्ति का ब्योरा देकर 30 फीसदी टैक्स और इसी अनुपात में जुर्माना अदा कर कानूनी कार्रवाई से बचा जा सकता है।