लाल मिट्टी से बनी पिच की बादशाह माने जाने वाली मुंबई को जम्मू-कश्मीर ने एक दशक बाद उसके घर में मात दी है।इसके जीत के पीछे टीम का परिश्रम और प्रबंधन की सोच है। लाल मिट्टी से बनी पिच पर टीम की बल्लेबाजी ढह न जाए और गेंदबाजों अपने गति का लाभ ले सकें इसके लिए खिलाड़ियों को प्रदेश में ही ऐसी पिच पर अभ्यास करवाया गया, जिस कारण टीम ने बड़ी जीत हासिल की है।
जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (जेकेसीए) में निजाम बदलने के बाद चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुविधाओं में बढ़ोतरी से क्रिकेट का कायाकल्प हो रहा है। कभी बीसीसीआई के बड़े टूर्नामेंट में प्लेट ग्रुप में रहने वाली जम्मू-कश्मीर की टीम अब एलीट ग्रुप में टॉप कर रही है। जम्मू-कश्मीर की महिला व पुरुष टीम का पिछले सालों के रिकॉर्ड के मुकाबले अब प्रदर्शन अच्छा हुआ है।
इसके पीछे इरफान पठान की दूरदर्शी सोच व वर्तमान उप समिति का बेहतर प्रबंधन है।पुरुष और महिला टीम को नियमित प्रशिक्षण देने के साथ उन्हें खेल का बेहतर माहौल मिल रहा है। अब घरेलू क्रिकेट सत्र की घोषणा के एक महीने पहले टीम चयन नहीं होता। अप्रैल से खिलाड़ियों के लिए अभ्यास मैच शुरू हो जाते हैं।
इसमें पहले खिलाड़ियों को आपस में मैच खिलाए जाते हैं और फिर अन्य राज्यों की टीमों के साथ मैच होते हैं। जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन की उप समिति के सदस्य ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता ने बताया कि खिलाड़ियों को बेहतर खेल सुविधाओं के साथ-साथ बेहतर कोचिंग दी जा रही है।