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Jammu Kashmir Elections 2024 : डोडा में ध्रुवीकरण पर टिकी जीत-हार, तीन पूर्व मंत्रियों की प्रतिष्ठा भी दांव पर

Sat, 14 Sep 2024 06:00 AM IST
दुष्यंत शर्मा डॉ. बृजेश कुमार सिंह, डोडा

सार

केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद भाजपा को यहां जीत मिली। अब 10 साल बाद होने जा रहे विधानसभा चुनाव में परिस्थितियां बदली हैं।
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जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जिला 2014 के विधानसभा चुनाव में तब सुर्खियों में आया जब यहां पहली बार भाजपा का कमल खिला। केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद भाजपा को यहां जीत मिली। अब 10 साल बाद होने जा रहे विधानसभा चुनाव में परिस्थितियां बदली हैं। अनुच्छेद 370 व 35ए समाप्त हो गया है। ऐसे समय में हो रहे चुनाव में भाजपा के साथ-साथ केंद्रीय मंत्री डॉक्टर जितेंद्र सिंह व पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद की साख दांव पर लगी है। 2014 तक जिले में डोडा व भद्रवाह, दो सीटें थीं। दोनों पर 2014 में कमल खिला। अनुच्छेद 370 हटने के बाद परिसीमन हुआ तो डोडा की भौगोलिक स्थिति के मद्देनजर अब डोडा व डोडा पश्चिम सीट का गठन किया गया है। दोनों सीटों पर जातीय समीकरण तो नहीं हैं, पर हिंदू व मुस्लिम मतों के ध्रुवीकरण पर ही जीत-हार का फैसला होने की उम्मीद है।

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जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) व कांग्रेस के बीच गठबंधन है, पर डोडा सीट पर दोनों पार्टियां लड़ रही हैं। नेकां व पीडीपी की ओर से अनुच्छेद 370 की बहाली की गारंटी के बाद भाजपा इसे मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है। डोडा पश्चिम  सीट पर हिंदू वोटर 60-65 फीसदी, तो मुस्लिम 30-35 फीसदी हैं। यहां अनुसूचित जाति के 16% वोटर हैं। इसके विपरीत डोडा में 25-26 फीसदी हिंदू व शेष मुस्लिम मतदाता हैं। लेकिन, यहां कांग्रेस, नेकां, डीपीएपी व पीडीपी के मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में हैं। आप से लोकसभा चुनाव लड़ चुके मेहराज मलिक भी लड़ रहे हैं। ऐसे में मुस्लिम मतों का विभाजन होना तय है। 

चुनाव में भाजपा इलाके में हुए विकास कार्यों व 370 हटने के बाद हुए बदलावों के नाम पर पार्टी वोट मांग रही है। वहीं, विपक्ष ने कानून-व्यवस्था, आतंकवाद के दोबारा उभरने व राज्य का दर्जा खाेने को मुद्दा बनाया है। एडवोकेट रमन प्रदीप कहते हैं, चुनाव स्थानीय मुद्दों पर ही लड़ा जाना चाहिए। अनुच्छेद 370  की बहाली की बात अलगाववादी सोच को बढ़ावा देने वाली है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इस तरह की गारंटी देना कानूनन जुर्म है। 
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तीन पूर्व मंत्रियों की प्रतिष्ठा भी दांव पर

  • डोडा में डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी (डीपीएपी) के उम्मीदवार व पूर्व मंत्री अब्दुल मजीद वानी, नेकां उम्मीदवार व पूर्व गृह मंत्री खालिद नजीब सुहरावर्दी मैदान में हैं। गुलाम नबी आजाद की ओर से स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए पहले चरण के प्रचार में सामने आने से इन्कार कर दिया गया था। साथ ही, उन्होंने पार्टी प्रत्याशियों से अपील की थी कि इस परिस्थिति में वह चाहें तो उम्मीदवारी वापस ले सकते हैं। इसके बाद भी वानी ताल ठोंक रहे हैं। डोडा में भाजपा ने युवा चेहरे आैर संघ के करीबी गजय सिंह राणा पर भरोसा जताया है।
  • डोडा पश्चिम से भाजपा-पीडीपी सरकार में राज्य मंत्री रहे शक्ति राज परिहार चुनाव लड़ रहे हैं। शक्ति राज ने 2014 में डोडा में कमल खिलाया था। इससे पहले वह 2008 में इंद्रवल सीट से भाजपा प्रत्याशी थे, लेकिन कामयाबी नहीं मिल सकी थी। 
  • डोडा में कुल 10 और डोडा पश्चिम में आठ उम्मीदवार मैदान में हैं।

डोडा 

  • डीपीएपी : 2002 व 2008 के विधानसभा चुनाव में जीते। सड़क व पुल निर्माण मंत्री रहे। 2014 में भाजपा के शक्ति परिहार से हारे।
  • नेकां : राज्य सरकार में  गृह मंत्री रह चुके हैं। डोडा में नेशनल कॉन्फ्रेंस के चेहरे के रूप में जाने जाते हैं।

डोडा पश्चिम  

  • भाजपा : डोडा में 2014 में कमल खिलाने का श्रेय। 2008 में इंद्रवल से चुनाव लड़े पर कामयाबी नहीं मिली। 
  • कांग्रेस : सेंट्रल यूनिवर्सिटी, जम्मू में शिक्षक हैं। पहली बार चुनाव लड़ रहे। नेकां के पूर्व विधायक चमन लाल समर्थन कर रहे हैंं।

चिनाब किनारे शहर, लेकिन पावर प्रोजेक्ट नहीं 
चिनाब वैली (चंद्रभागा क्षेत्र) डोडा में बेरोजगारी बड़ा मुद्दा है। शहर चिनाब दरिया के किनारे बसा है, लेकिन पूरे जिले में एक भी जल विद्युत परियोजना स्थापित नहीं की गई है। रोजगार के नाम पर सरकारी नौकरियों और व्यवसाय के भरोसे रहने वाली यहां की जनता को जिले में उद्योग-धंधे न होने का मलाल है। कुछ लोग खेती करते हैं पर यह भी लाभदायक नहीं है। बस किसी तरह गुजर-बसर हो पाता है। लोगों का कहना है कि तमाम विकास कार्यों का ढिंढोरा पीटा जाता है, लेकिन अब भी तस्वीर नहीं बदली है। अब भी लोग रोजी-रोजगार के लिए मारे-मारे फिर रहे हैं। डाक बंगला इलाके के दुकानदार रियाज अहमद ने बताया कि स्नातक तक इस आस में पढ़ाई की कि नौकरी मिल जाएगी। नौकरी खोजते-खोजते उम्र निकल गई। अब किसी तरह दुकान के भरोसे परिवार का गुजारा करना पड़ रहा है। रियाज कहते हैं, सरकार को विकास के साथ ही रोजगार की ओर भी ध्यान देना चाहिए ताकि युवाओं का अन्यत्र शहरों में पलायन न हो।

दो टनल व हाईवे निर्माणाधीन, बदलेगी तस्वीर : डोडा जिले में दो टनल निर्माणाधीन हैं। एक खिलैनी से पुल डोडा इलाके तक और दूसरी गोहा मरमत से सुद्ध महादेव तक। इससे आवागमन सुगम होगा और जम्मू तक पहुंचना आसान हो जाएगा। दोनों ही टनल का निर्माण कार्य भाजपा के शासनकाल में शुरू हुआ है। भाजपा सांसद व केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह कहते हैं, डोडा के विकास के लिए प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं। आने वाले दिनों में इसका असर देखने को मिलेगा। जम्मू तक पहुंचना आसान हो जाएगा। साथ ही किसी न किसी रूप में रोजगार व स्वरोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा। 

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