कश्मीर में त्राल आतंकवाद का ठौर माना जाता था। इसकी तुलना अफगानिस्तान के तोरा बोरा से होती थी। तोरा बोरा की पहाड़ी गुफाओं में जिस तरह अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन ने अपना ठिकाना बनाया था, उसी तरह त्राल बुरहान वानी व जाकिर मूसा जैसे आतंकियों की शरणस्थली रहा है। यह घने जंगल और दूर-दूर बिखरे घरों वाला इलाका है। पहाड़ी रास्ते। संकरी घुमावदार सड़कें। न कोई बड़े कारोबार न विकास के पैमाने पर फिट बैठने वाली राजनीतिक सुविधाएं। त्राल के सबसे खूबसूरत इलाके शिकारगाह में रहने वाले सलीत कहते हैं, वह वक्त था जब चुनाव प्रचार कम ही होता था और वोट भी कम ही पड़ते थे। त्राल ऐसा इलाका है जहां कई पीढ़ियां गुजर गईं लेकिन परिवार में से किसी ने वोट नहीं डाले। वजह सिर्फ एक थी, आतंकवादियों का डर। उनके घर में भी किसी ने कभी वोट नहीं डाला। अब हालात सुधर चुके हैं। यहां अब सक्रिय आतंकी भी नहीं। पहले शाम 6 बजे दुकानें बंद हो जाती थीं। अब 10 बजे तक खुली रहती हैं। हां लेकिन... खौफ से बेखौफ होने की अब तक आदत नहीं हुई, इसलिए अंधेरा होते ही सड़कों को सूनसान हो जाना पड़ता है।
इंजीनियर रशीद की पार्टी के सिख प्रत्याशी हरबख्श प्रचार के लिए जाते हैं तो मुस्लिम महिलाएं पगड़ी चूमकर देती हैं दुआएं
त्राल विधानसभा सीट पर तीन सिख चुनाव मैदान में हैं। उनमें से एक हैं हरबख्श सिंह। पीडीपी छोड़कर इंजीनियर रशीद की पार्टी में आए हैं। 2021 में त्राल से डीडीसी का चुनाव जीता तो उनके हिस्से किसी गैर मुसलमान के सबसे ज्यादा मार्जिन से जीतने का दिक्षण कश्मीर में रिकॉर्ड बना। हरबख्श कहते हैं, उन्होंने पीडीपी को 13 साल दिए। उसके नेताओं ने कहा था, उनका टिकट पक्का है। लेकिन फिर आधे घंटे पहले पार्टी ज्वाइन करने वाले को टिकट दे दिया। हरबख्श को अपनी जीत का भरोसा है। कहते हैं, यहां के लोग उनसे मोहब्बत करते हैं। आखिर उनके लिए इतने साल काम किया है। वह जब प्रचार के लिए जाते हैं तो मुस्लिम महिलाएं उनकी पगड़ी चूमकर दुआएं देती हैं। हर दिन 3-4 नोटों की मालाएं पहनाई जाती हैं। छोटे-छोटे बच्चों को भी उनका चुनाव चिह्न पता है।
अपने मोहल्ले में हरबख््श का अकेला सिख परिवार है। लेकिन, आजतक न वहां सुरक्षाकर्मी लगे, न बंकर बना न ही कभी हमला हुआ। वह कहते हैं कि त्राल की पहचान बुरहान वानी और जाकिर मूसा से नहीं बल्कि यहां के इस्लाम और सेकुलरिज्म से होनी चाहिए। जेल फ्री कश्मीर उनका नारा है। हरबख्श कहते हैं, इंजीनियर रशीद भले नॉर्थ कश्मीर के नेता हों, पर उनके इलाके में रशीद की बहुत इज्जत है। उन्हें तिहाड़ में डालने का जनता जवाब देगी। उनके इलाके के बच्चों को पुलिस और एजेंसी सिर्फ इसलिए जेल में डाल देती है क्योंकि उसने फेसबुक पर कुछ लिखा या उसके फोन में किसी का फोटो मिला। यह बंद करना होगा। हरबख्श ने आरोप लगाया कि कश्मीर के नेताओं ने इन बच्चों के लिए कुछ नहीं किया। कहते हैं, यही वजह है कि महबूबा मुफ्ती की रैली में जितने लोग आते हैं उतनी तो इंजीनियर रशीद के जलसे में गाड़ियां होती हैं। उनका दावा तो यह भी है कि जब पिछले दिनों रशीद के बेटे की त्राल में रैली हुई तो 250 गाड़ियां उसमें शामिल हुईं। पहली बार कश्मीर में पंजाब की तरह लोग ट्रैक्टर लेकर आए।
कश्मीर के त्राल व बारामुला में सबसे ज्यादा सिख आबादी है। हरबख्श सिंह सासन को पूरा भरोसा है कि 2 प्रतिशत सिख आबादी वाले कश्मीर में 98 प्रतिशत वाली मुस्लिम अवाम सिख नेता को विधानसभा तक जरूर पहुंचाएगी।