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Jammu Kashmir Elections 2024 : 50 प्लस के लक्ष्य पर टिकीं निगाहें, घाटी में कमल खिलाने की रणनीति पर फोकस

Thu, 05 Sep 2024 05:59 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

इसके लिए कश्मीर में कमल खिलाने की रणनीति पर काम चल रहा है। गुपचुप तरीके से बैठकों में रणनीति को धार दी जा रही है। इसका जिम्मा चुनाव प्रभारी राम माधव के कंधों पर है।
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राममाधव। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भाजपा ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव को लेकर 50 प्लस के लक्ष्य पर निगाहें टिका ली हैं। इसके लिए कश्मीर में कमल खिलाने की रणनीति पर काम चल रहा है। गुपचुप तरीके से बैठकों में रणनीति को धार दी जा रही है। इसका जिम्मा चुनाव प्रभारी राम माधव के कंधों पर है।

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अभी तक वह किसी बड़े सार्वजनिक मंच से भाषण देते नजर नहीं आए हैं। आते ही उन्होंने सबसे पहले कश्मीर का दौरा कर बैठकें कीं। 2014 में भी राम माधव जनरल सेक्रेटरी रहते हुए पार्टी के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।

जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनाव में पड़ोसी राज्यों के मंत्री, विधायक, वरिष्ठ नेता, राष्ट्रीय प्रवक्ता सहित कई केंद्रीय मंत्री नियमित दौरा कर रहे हैं और विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में 50 प्लस के लक्ष्य को हासिल करने पर काम किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार माधव भाजपा में डेमेज कंट्रोल और विधानसभा चुनाव के लिए प्रभावी आंतरिक रणनीति पर काम कर रहे हैं। पार्टी में माना जाता है कि जब पेंच की स्थिति आती है, तो राम माधव को याद किया जाता है।
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पार्टी ने अब तक अपने 51 प्रत्याशियों के नाम की घोषणा की है और दावा किया कि वे सभी सीटों पर लड़ेंगे। प्रदेशाध्यक्ष रविंद्र रैना भी कह चुके हैं कि कश्मीर में खासतौर पर मजबूत चेहरे के लिए निर्दलीय उम्मीदवारों की तलाश की जा रही है। ऐसे में यह भी कहा जा रहा है कि कश्मीर में कमल खिलाने के लिए माधव लक्षित फार्मूले पर काम कर रहे हैं।

कश्मीर में निर्दलीय उम्मीदवारों की तलाश
भाजपा कश्मीर के उन क्षेत्रों में निर्दलीय उम्मीदवारों की तलाश कर रही है, जहां भाजपा की क्षमता अधिक आंकी जाती है। सूत्रों के अनुसार कुछ वरिष्ठ नेताओं को छोड़कर राम माधव के आने और जाने की आम कैडर को कोई सूचना नहीं होती है। माधव अधिकांश देर शाम को पहुंचते हैं और महत्वपूर्ण बैठकें करके सुबह की दिल्ली लौट जाते हैं। वर्ष 2014 में भाजपा को 25 और पीडीपी को 28 सीटें मिली थीं। किसी भी दल के पास पूर्ण बहुमत न होने के कारण गठबंधन मजबूरी थी।

अनुच्छेद 370, अफस्पा, पाकिस्तान से आने वाले शरणार्थियों का भविष्य जैसे मुद्दों पर भाजपा और पीडीपी के नजरिए अलग थे। तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने माधव को पार्टी का मुख्य वार्ताकार बनाकर जम्मू-कश्मीर में भेजा था। उन्हीं की रिपोर्ट के आधार पर मुफ्ती मोहम्मद सईद के साथ भाजपा की पीडीपी के साथ सरकार बनी थी।

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