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Jammu Kashmir : पहले भी जम्मू-कश्मीर के बाशिंदे देते थे संपत्ति कर, 1997 तक करते रहे भुगतान

Sun, 26 Feb 2023 11:05 AM IST
दुष्यंत शर्मा बृजेश कुमार सिंह, जम्मू

सार

पहले भी यहां यह कर लगता था और लोग इसका बाकायदा भुगतान करते थे। टैक्स की अंतिम डिमांड नोटिस 1997 तक आई है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : इंटरनेट
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विस्तार
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जम्मू-कश्मीर में संपत्ति कर (प्रापर्टी टैक्स) कोई नया नहीं है। पहले भी यहां यह कर लगता था और लोग इसका बाकायदा भुगतान करते थे। टैक्स की अंतिम डिमांड नोटिस 1997 तक आई है। इसके बाद डिमांड आना बंद हो गई। शहर के पुराने बाशिंदे बताते हैं कि प्रापर्टी टैक्स के लिए मुबारक मंडी में कार्यालय भी था।

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सूत्रों का कहना है कि 1996 में नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार जब पूर्ण बहुमत के साथ बनी, इसके बाद प्रापर्टी टैक्स खत्म किया गया। जानकार बताते हैं कि पहले भी सरकारों की ओर से प्रापर्टी टैक्स लिया जाता था। जिसे दो किस्तों में जमा करने का प्रावधान था। मुबारक मंडी में पुराने हाईकोर्ट के पीछे वाली गली में दूसरी मंजिल पर इसका कार्यालय था। लोगों को डिमांड नोटिस मिलता था और वे आराम से जाकर वहां टैक्स जमा कर दिया करते थे। शास्त्री नगर निवासी एक सेवानिवृत्त अफसर बताते हैं कि मई 1982 से सितंबर 1984 का प्रापर्टी टैक्स का डिमांड नोटिस एक साथ नौ नवंबर 1984 को आया था। यह नोटिस 1514 रुपये के लिए था। अंतिम नोटिस उन्हें अक्तूबर 1996 से मार्च 1997 तक का 510 रुपये का आठ अगस्त 1997 को जारी किया गया।

उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर शहरी अचल संपत्ति कर नियम 1962 के तहत इसकी वसूली होती थी। डिमांड के लिए शहरी अचल संपत्ति कर निर्धारण प्राधिकारी की ओर से फार्म एच जारी किया जाता था। इसमें भी किस्त जमा करने के लिए समय तय किया जाता था। यदि तय समय पर किस्त जमा नहीं होती तो जुर्माने का भी प्रावधान था। जुर्माने की रकम किस्त की राशि के एक चौथाई से अधिक नहीं होगी।
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जिन हुक्मरानों के समय में था प्रापर्टी टैक्स वे भी विरोध में उतर आए
ज्ञात हो कि 1996 में प्रापर्टी टैक्स खत्म करने के लगभग 25 साल से अधिक समय तक प्रापर्टी टैक्स नागरिकों की ओर से जमा नहीं किया गया। अब जब एलजी प्रशासन ने इसे जारी किया तो जिन हुक्मरानों के समय में प्रापर्टी टैक्स वसूला जाता था वे भी विरोध में खड़े हो गए। सभी राजनीतिक दलों समेत तमाम संगठनों ने इसके खिलाफ आवाज बुलंद की है।

सरकार ने कोई पहली बार संपत्ति कर नहीं लगाया है। पहले भी यहां के लोग देते रहे हैं। उनके पास तो 1982-84 से 1996-97 तक का डिमांड है। उन्होंने कई बार मुबारक मंडी कार्यालय में जाकर इसे जमा भी किया है। यह टैक्स जम्मू-कश्मीर शहरी अचल संपत्ति कर नियम 1962 के तहत लगता था। 1996-97 के बाद डिमांड आना बंद हो गया। यह किस आदेश के तहत बंद हुआ इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। 
- वीके सेठी, सेवानिवृत्त संयुक्त निदेशक, शिक्षा विभाग

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