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Jammu Kashmir : भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर लोकतंत्र का जश्न, देश के अंतिम मतदान केंद्रों पर दिखा जबर्दस्त उत्साह

Sun, 26 May 2024 05:31 AM IST
दुष्यंत शर्मा डॉ. बृजेश कुमार सिंह, सियाल करमाड़ा (भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा)।

सार

यहां लोकतंत्र के पर्व पर जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। भारत के अंतिम मतदान केंद्र सियाल करमाडा और दिगवार मलदयाला में सुबह से ही वोटरों की लंबी कतारें लगी रहीं। सुबह 10 बजे के बाद खासकर महिलाओं की लंबी लाइनें दिखीं। यहां के वोटर इस बार पाकिस्तानी गोलाबारी लंबे समय से न होने से काफी खुश हैं। इनका कहना है कि देश की सरहदों को और मजबूत करने के लिए उन्होंने जमकर मतदान किया है।
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राजोरी के एक सरहदी गांव में तारबंदी के पास बने मतदान केंद्र पर वोट डालने के बाद जमा लोग। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अनंतनाग-राजोरी लोकसभा सीट में राजोरी और पुंछ के कई इलाके भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा से सटे हैं। यहां लोकतंत्र के पर्व पर जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। भारत के अंतिम मतदान केंद्र सियाल करमाडा और दिगवार मलदयाला में सुबह से ही वोटरों की लंबी कतारें लगी रहीं। सुबह 10 बजे के बाद खासकर महिलाओं की लंबी लाइनें दिखीं। यहां के वोटर इस बार पाकिस्तानी गोलाबारी लंबे समय से न होने से काफी खुश हैं। इनका कहना है कि देश की सरहदों को और मजबूत करने के लिए उन्होंने जमकर मतदान किया है।

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अंतिम मतदान केंद्र सियाल करमाड़ा में पोलस, अजोट समेत आसपास के गांवों का वोट पड़ा। मतदान केंद्र मोबाइल स्कूल सियाल में सुबह से ही लाइन खत्म होने का नाम नहीं ले रही थी। मतदान केंद्र के बाहर छाया का प्रबंध नहीं दिखा फिर भी चिलचिलाती धूप में लोग लाइन में खड़े रहे। बुजुर्ग अब्दुल गनी, मोहम्मद शकील, प्रथम वोटर वाहिद इकबाल तथा मोहम्मद फारूक ने बताया कि यह गांव तीन तरफ से पाकिस्तान से घिरा है। गोलाबारी में कई लोगों की जान जा चुकी है। तीन साल से यहां शांति है।

2021 में अंतिम बार गोलाबारी हुई थी, जिसमें एक ही घर के तीन लोगों की मौत हो गई थी। एक किलोमीटर के बाद सरहद शुरू हो जाती है। पहले गोलाबारी के डर से लोग घरों से बाहर निकलने से कतराते थे, जिससे कम मतदान होता था। इस बार ऐसा डर बिल्कुल भी नहीं था। इस केंद्र पर महिलाओं की लाइन पुरुषों से लंबी दिखी, लेकिन वह बात करने से कतराती रहीं। एक महिला ने नाम न बताते हुए कहा कि इस बार गोलाबारी का डर नहीं है तो काम निपटाकर वह परिवार के साथ वोट डालने पहुंची हैं। सेक्टर मजिस्ट्रेट मो. शफीक ने बताया कि 854 वोट यहां पड़ने हैं। सुबह से ही लोग मतदान के प्रति उत्सुक दिखे हैं।
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दिगवार सेक्टर में एलओसी पर अंतिम मतदान केंद्र मलदयाला में महिलाओं में खासा उत्साह दिखा। इस गांव के कई लोग पुंछ तथा जम्मू में नौकरी करते हैं। वह केवल वोट डालने के लिए परिवार के साथ यहां पहुंचे थे। एडवोकेट महेंद्र प्यासा ने बताया कि बमुश्किल एक किलोमीटर पर एलओसी है। इलाके में अब पाकिस्तानी गोलाबारी न होने से सुख समृद्धि आई है। लोगों को अपनों को खोने का दुख नहीं झेलना पड़ रहा है। यहीं रिटायर्ड मंजीत सिंह ने भी मतदान किया। उन्होंने बताया कि तीन साल से हालात बदले हैं। यह स्थिति आगे भी जारी रहनी चाहिए। मलदयाला तक काफी संख्या में लोग अपने चार पहिया वाहनों से पहुंचे। स्कूल के बाहर खाली पड़ा मैदान वाहनों से भर गया था। यहां 1023 मत थे, जहां सुबह 10 बजे तक 484 मत पड़ चुके थे। दिगवार सेक्टर में ही अजोट देरियां गांव में भी मतदान का उत्साह रहा। यहां सुबह के वक्त मतदान धीमा रहा, लेकिन समय के साथ लोग पहुंचते रहे।

गोलाबारी रुकी तो सोलर पैनल लग गए
सीमावर्ती इलाकों में गोलाबारी थमी तो सोलर पैनल लग गए। बिजली के लिए लोगों ने घरों पर सोलर पैनल लगा रखे हैं। मिडिल स्कूल मलदयाला का मतदान केंद्र भी सोलर पैनल से आबाद नजर आया। बगल के घर में सोलर पैनल के जरिये बिजली आपूर्ति हो रही है। लोगों का कहना है कि पाकिस्तानी गोलाबारी बंद होने से इनके क्षतिग्रस्त होने का खतरा नहीं रह गया है।

सियाल में घर-घर में बंकर
सियाल गांव में पाकिस्तानी गोलाबारी से बचने के लिए सरकार की ओर से बंकर बनवाए गए हैं। गांव के मो. शकील ने बताया कि पाकिस्तानी गोलाबारी के दौरान यह बंकर उनकी जीवन रक्षा में मददगार बने हैं। घर-घर में बंकर हैं, हालांकि, कुछ घर के लोग इससे वंचित भी रह गए हैं। बंकरों की वह खुद ही सफाई रखते हैं। केवल सियाल ही नहीं बल्कि आस पास के गांवों में भी सामुदायिक बंकर बनवाए गए हैं।

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