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जम्मू कश्मीर: सूखे तालाबों में जान फूंकेगी सेना, ग्रामीणों के साथ मवेशियों की बुझेगी प्यास

Fri, 07 Apr 2023 11:48 AM IST
विमल शर्मा अजय मीनिया, जम्मू

सार

पलांवाला के गांव मिलन दी खुई में सूख चुके 100 साल पुराने तालाब से इसकी शुरूआत की गई है। इसके लिए बाकायदा ड्रोन से तस्वीरें ली गईं है और अब इसके आधार पर इसका आगे का काम चलेगा।
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पानी (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
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विस्तार
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भारतीय सेना सीमावर्ती इलाकों की सिर्फ रक्षा ही नहीं करेगी, बल्कि आने वाले समय में ग्रामीणों और उनके माल-मवेशियों की प्यास भी बुझाएगी। सेना ने सूख चुके वर्षों पुराने तालाबों में फिर से जान डालने का काम शुरू कर दिया है। ऐसे तालाबों को स्थानीय लोगों के साथ मिलकर पुनर्जीवित करने के लिए सेना ने अमृत सरोवर मिशन के तहत मिशन तालाब शुरू किया है। 

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पलांवाला के गांव मिलन दी खुई में सूख चुके 100 साल पुराने तालाब से इसकी शुरूआत की गई है। इसके लिए बाकायदा ड्रोन से तस्वीरें ली गईं है और अब इसके आधार पर इसका आगे का काम चलेगा।

मिशन अमृत सरोवर के तहत सेना की अलग-अलग यूनिट ने सूख चुके तालाबों और सरोवरों के जीर्णोद्धार का काम शुरू किया है। इसके लिए सेना ड्रोन के जरिए तालाबों का जायजा ले रही है और तालाब किस तरह से बनाना है, इसकी रणनीति तैयार की जा रही है। तालाब का दोबारा निर्माण करने के लिए ट्रैक्टर और जेसीबी की भी मदद ली जा रही है। इतना ही नहीं सेना के जवान खुद भी तालाब से मिट्टी उठाने और इसमें पत्थरों को भरने का काम कर रहे हैं।
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क्रॉस स्वॉर्ड डिवीजन कर रही काम
सेना की व्हाइट नाइट कोर की क्रॉस स्वॉर्ड डिवीजन ने मिलन दी खुई में तालाब को पुनर्जीवित करने का जिम्मा लिया है। इसमें मिट्टी हटाने, किनारों का निर्माण करने का काम शुरू किया गया है। आने वाले दिनों में तालाब को गहरा करने, इसमें शीट बिछाने, कचरा हटाने आदि का काम किया जाएगा।

यह अभियान हर जगह के लिए है। यहां पर भी जरूरत महसूस होगी, या फिर गांव के लोग संपर्क करेंगे, वहां स्थानीय लोगों और जिला प्रशासन के साथ मिलकर तालाबों को पुनर्जीवित करने का काम किया जाएगा। -प्रवक्ता, सेना।

उक्त तालाब से गांव कचरियाल, मिलन दी खुई के करीब दो हजार लोग पानी पीते थे, लेकिन यह तालाब धीरे-धीरे सूख गया। क्योंकि यह इलाके भी कंडी क्षेत्र के हैं। तालाब में पानी की जगह हर तरफ झाड़ियां उगीं थी। हमने कुछ पैसा खर्च करके झाड़ियां साफ कीं। इसके बाद अब सेना इस तालाब का दोबारा निर्माण कर रही है। - अनुराधा, सरपंच, शमवन।

कभी तालाबों का शहर था जम्मू

बता दें कि एक समय में जम्मू को तालाबों का शहर कहा जाता था। यहां तक कि शहर के दर्जनों ऐसे इलाके हैं, जिनके नाम आज भी तालाबों के नाम पर हैं। इनमें बन तालाब, तालाब तिल्लो, बाबे तालाब, रानी तालाब आदि शामिल हैं। लेकिन एक-एक कर शहर और आसपास के इलाकों में तालाब सूख चुके हैं। यहां तक कि सीमावर्ती गांवों में भी तालाब सूख चुके हैं। खस्ता हालत के चलते जम्मू के दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को गर्मियों में पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सेना की यह मुहिम आने वाले दिनों में इन लोगों की प्यास बुझाने का काम करेगी।

गांव के लोग भी उत्साहित : मिलन दी खुई गांव के रहने वाले यशपाल का कहना है कि तालाबों को दोबारा जिंदा करने के लिए वे लोग भी सेना का सहयोग करेंगे। इससे न केवल उनके पशुओं को फायदा मिलेगा, बल्कि खेतों की सिंचाई भी कर सकेंगे। वहीं, तरसेम लाल का कहना है कि वे लोग सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर तालाब बनाने में सहयोग कर रहे हैं। लोगों के मुताबिक उनके गांव में तालाब बनने से उनकी पानी को लेकर होने वाली ज्यादातर दिक्कत दूर हो जाएगी। सीमा देवी का कहना है कि उनके माल-मवेशियों को पानी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। गांव में खेती और दूसरे कामों के लिए भी तालाब का पानी बड़ी मदद साबित होगा।

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