जम्मू-कश्मीर की करीब 4291 पंचायतों को पल्ली पंचायत की तरह कार्बन तटस्थ बनाने में आईआईटी जम्मू सहायता करेगा। अब प्रदेश की प्रत्येक पंचायत सौर ऊर्जा संचालित होगी। सभी का रिकार्ड भी डिजटल होगा। इससे ग्रामीण इलाके आदर्श के रूप में उभर कर सामने आएंगी।
इस प्रक्रिया को सफल करने के लिए हर पंचायत के हर गांव और घर में जाकर सर्वे कर आंकड़ा एकत्रित किया जाएगा। इसमें पंचायत अधिकारियों का डाटा एकत्रित करने में सहयोग और योगदान रहेगा।
एकत्रित डाटा के आधार पर आईआईटी परियोजना तैयार कर सफलता की राह दिखाएगा। सरकार जल्द ही एक पोर्टल का भी प्रक्षेपण करने जा रही है। इस पोर्टल पर डाटा को अपलोड किया जाएगा।
ग्रामीण विकास विभाग एवं पंचायती राज की ओर से ग्रामीण परिवेश को विकसित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। इसका उद्देश्य पंचायतों को कार्बन न्यूट्रल बनाना है। आईआईटी जम्मू की उन्नत भारत अभियान टीम इसके पहले की तरह जमीनी स्तर पर अन्य लोगों की सहायता से काम करेगी। प्रदेश के करीब 120 पंचायत सचिवों को आईआईटी जम्मू में एक दिवसीय कार्यक्रम में भी संबंधित विषय के बारे में प्रशिक्षित किया गया है।
पल्ली पंचायत को विकसित करने में भी आईआईटी का रहा योगदान
प्रदेश की सभी पंचायतों का विकास करने के लिए आवासीय ऊर्जा उपयोग और अपशिष्ट उत्पादन सर्वेक्षण के संचालन और विश्लेषण का कार्य किया जाएगा। जानकारी के अनुसार देश भर के लिए मिसाल बनी सांबा की पल्ली पंचायत को विकसित करने में आईआईटी का योगदान रहा है।
संस्थान ने डोगरा डिग्री कॉलेज और गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक जम्मू के छात्रों की दो टीमों से पल्ली के 724 घरों का ऊर्जा सर्वेक्षण और अपशिष्ट सर्वेक्षण करवाया था। उसके बाद संस्थान की टीम ने अपने 16 छात्रों के सहयोग से डाटा को डिजिटल किया।