जीएमसी जम्मू में रोजाना पहुंच रहे 50 से 60 नए मामले, अकेले 95 फीसदी मामले डॉग बाइटिंग के
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। शहरों के घरों में कुत्तों, बिल्लियों और अन्य प्रजाति के जानवरों को पालने का चलन बढ़ा है। खासतौर पर कोविड के दौरान लोगों के घरों में बंद रहने के कारण यह शौक बढ़ा है। इस शौक के साथ जानवरों के काटने के मामलों में भी तेजी से वृद्धि हुई है। इनमें 95 प्रतिशत तक मामले कुत्तों के काटने के हैं। जीएमसी जम्मू की रेबीज सेक्शन में रोजाना 50 से 60 जानवरों के काटने के मामले पहुंच रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या में मामले घरेलू पालतू जानवरों से संबंधित हैं।
नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक शहर के 75 वार्डों में ही अनुमानित 40 हजार आवारा कुत्ते हैं। निगम का यह भी दावा है कि कई सालों में एक अभियान के तहत हजारों कुत्तों की नसबंदी कर दी गई है। हालांकि, जमीनी स्तर पर लगभग हर वार्ड में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या से निजात मिलती नजर नहीं आ रही है। दूसरी ओर घरों में पालतू जानवरों के पालने का चलन बढ़ने से लोग उनके शिकार बन रहे हैं, जिसमें ज्यादातर बच्चे हैं। जीएमसी की रेबीज सेक्शन में गत वर्षो में पहले रोजाना औसतन 100 मामले आते थे, जिनमें 40 के करीब नए और अन्य पुराने होते थे। लेकिन, अब नए मामलों का आंकड़ा बढ़कर 50 से 60 तक हो गया है और औसतन 150 तक मामले आ रहे हैं। इनमें शहरी और ग्रामीण क्षेत्र शामिल हैं। संभाग स्तर के चिकित्सा केंद्रों में भी ऐसे दर्जनों मामले रोजाना आ रहे हैं। जीएमसी की रेबीज सेक्शन में गत 30 मार्च को 51, एक अप्रैल को 52 और दो अप्रैल को 66 जानवरों के काटने के मामले रिपोर्ट हुए है।
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श्रेणी-3 में लगती है वैक्सीन और सिरम
जीएमसी जम्मू के पीएसएम कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के एचओडी डाॅ. राजीव गुप्ता के अनुसार श्रेणी 3 के मामले में जानवर द्वारा काटे गए स्थान पर सिरम और साथ में एंटी रेबीज वैक्सीन लगाना जरूरी होता है। अगर पीड़ित के शरीर के विभिन्न हिस्से पर जानवर द्वारा काटा गया है तो उन सभी जगहों पर सिरम दी जाती है। अगर वैक्सीन को बीच में छोड़ा दिया जाए तो रेबीज होने की आशंका रहती है। एंटी रेबीज वैक्सीन शरीर के भीतर 7 से 10 दिन में एंटीबाडीज बनाती है, जो लायसा वायरस से लड़ती है। जबकि सिरम शरीर के नर्विस सिस्टम से दिमाग तक पहुंचने वाले वायरस को रास्ते में रोक देता है। यह 24 से 72 घंटे के भीतर असर करना शुरू कर देता है।
एक मादा छह माह में प्रजनन को तैयार होती
एक मादा छह माह के भीतर प्रजनन को तैयार हो जाती है। वह एक बार में 12 से 14 पिल्लों को जन्म दे सकती है। प्रजन्न के दौरान कुत्तों के इंसानों या आपस में काटने के अधिक मामले होते हैं। इसमें एक साथ कई कुत्ते झुंड में चलते है। इसमें एक अल्फा नामक कुत्ता होता है, जो किसी पर भी हमला कर सकता है। उसे देखकर अन्य कुत्ते भी हमला बोल देते हैं।
जीएमसी में हर साल दस हजार मामले आ रहे
जीएमसी की रेबीज सेक्शन में हर साल औसतन दस हजार जानवरों के काटने के मामले पहुंच रहे हैं। इनमें 95 प्रतिशत कुत्तों के काटने के मामले होते हैं। रेबीज सेक्शन में 2019 में 10952 मामले आए और उस साल पांच लोगों की रेबीज से मौत हुई थी। आगामी वर्षों में भी यह औसतन जारी है।
जानवर के काटने के बाद ऐसे करें बचाव
- पागल कुत्ते या अन्य किसी जानवर के काटने पर तुरंत जख्म वाले स्थान को साबुन से धोएं और चिकित्सीय परामर्श लें
- पालतू कुत्ते के काटने पर सुनिश्चित करें कि उसे पर्याप्त वैक्सीन दी गई है या नहीं
- किसी भी कुत्ते को खासतौर पर अधिक तापमान में उग्र न करें, जिससे वे नुकसान पहुंचाएं
- छोटे घाव को खुला रखें और जानवर के काटने पर पूरे कोर्स में वैक्सीन अन्य चिकित्सा लें