कैंसर मरीजों के लिए राहत की खबर है। जीएमसी जम्मू के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में अत्याधुनिक नेक्स्ट जनरेशन सिक्वेंसिंग (एनजीएस) तकनीक पर कैंसर जेनेटिक परीक्षण सुविधा शुरू की गई है। इस टेस्ट में कैंसर मरीज द्वारा परिवार के अन्य सदस्यों को मिलने वाली इस जेनेटिक बीमारी का पहले ही पता चल जाएगा, जिससे पीड़ित को शुरू से उचित इलाज देकर बीमारी से लड़ने के लिए तैयार किया जाएगा। इस टेस्ट में रक्त आदि के सैंपल लिए जाते हैं।
इस टेस्ट में अगर मरीज कैंसर पॉजिटिव आ जाता है तो बीमारी उसके परिवार के अन्य सदस्यों तक न पहुंचे, इसके लिए उनका भी टेस्ट पहले ही कर लिया जाता है। अगर दुर्भाग्यवश परिवार का कोई सदस्य जेनेटिक या अन्य कारणों से पॉजिटिव आ जाता है तो पूर्व में कैंसर बीमारी का उचित इलाज संभव हो पाता है।
इससे कैंसर को प्राथमिक स्टेज में ही पकड़ लिया जाएगा। जीएमसी के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के एचओडी डा. संदीप डोगरा ने बताया कि कोविड 19 के दौरान सिक्वेंसिंग टेस्ट के लिए जीएमसी को एनजीएस उपकरण प्रदान किए गए थे। कोविड के लगभग खत्म होने के बाद अब ऐसे उपकरण का कैंसर सहित अन्य बीमारियों के परीक्षण के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें ऑन्कोलॉजी क्षेत्र की पहचान की गई है।
एनजीएस तकनीक में डीएनए आधारों आदि का मूल्यांकन किया जाता है। स्तन कैंसर के रोगियों की बीआरसीए1 और बीआरसीए2 जीन म्यूटिशियन की जांच की जाएगी। बीआरसीए1 या बीआरसीए2 जीन में उत्परिवर्तन होने से 70 वर्ष की आयु तक किसी महिला में स्तन कैंसर विकसित होने का खतरा रहता है।
इसमें 65-85 प्रतिशत में बीआरसीए1 और 40-80 प्रतिशत तक बीआरसीए म्यूटेशेन जिम्मेदार होता है। जीएमसी के प्रिंसिपल डा. आशुतोष गुप्ता ने कहा कि इस टेस्ट सुविधा के लिए जीएमसी जम्मू परीक्षण करने वाला प्रदेश में पहला सरकारी अस्पताल बना है।
मुंह, फेफड़े, सर्वाइकल, स्तन कैंसर 50 प्रतिशत मौतों के लिए जिम्मेदार
कैंसर में 50 प्रतिशत मौतों के लिए मुंह, फेफड़े (पुरुषों में) सर्वाइकल और स्तन (महिलाओं में) कैंसर जिम्मेदार है। जम्मू कश्मीर में पिछले पांच वर्षों में 55 हजार से अधिक कैंसर के मामले पंजीकृत हुए हैं। हर साल कैंसर मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है।