पूर्व मंत्री बाबू सिंह हिजबुल मुजाहिदीन आतंकियों के साथ मिलकर जम्मू-कश्मीर, पीओके और बाल्टिस्तान को मिलाकर अलग मुल्क बनाना चाहता था। नेचर मैनकाइंड फ्रेंडली ग्लोबल पार्टी बनाकर बाबू सिंह इसके लिए सीमा पार से पैसा जुटा रहा था। राज्य जांच एजेंसी (एसआईए) ने यह आरोप तृतीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जम्मू की अदालत में पेश चार्जशीट में लगाए हैं।
एसआईए प्रवक्ता के अनुसार दक्षिण कश्मीर के कोकरनाग निवासी मोहम्मद शरीफ शाह को जम्मू में 6.90 लाख रुपये की हवाला राशि के साथ पकड़ा गया था। इस गिरफ्तारी के बाद बाबू सिंह फरार हो गया, जिसे नौ अप्रैल को पकड़ लिया गया। शाह को बाबू सिंह ने श्रीनगर से हवाला का पैसा लाने को कहा था। इस पैसे से देश विरोधी गतिविधियां चलाई जानी थीं। बाबू सिंह भद्रवाह निवासी और पाकिस्तान से ऑपरेट कर रहे हिजबुल मुजाहिदीन आतंकी मोहम्मद हुसैन खतीब के संपर्क में था।
बताय गया कि पैसा जुटाने के लिए बाबू सिंह ने दुबई का दौरा भी किया। हिजबुल के अलावा बाबू सिंह का नेटवर्क जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट से भी जुड़ा रहा। ग्लोबल पार्टी जम्मू-कश्मीर, पीओके और बाल्टिस्तान को मिलाकर आजाद मुल्क बनाना चाहती थी, जिसे पाकिस्तान से फंडिंग हो रही थी। एसआईए के अनुसार ग्लोबल पार्टी जम्मू-कश्मीर की मुद्रा, विदेश मामले और वित्त पर भारत और पाकिस्तान का संयुक्त नियंत्रण चाहती है। इस मकसद को पूरा करने के लिए शाह को पार्टी का सचिव बनाया गया और खतीब के जरिए हवाला का पैसा कश्मीर पहुंचाकर फिर बाबू सिंह तक पहुंचाने का चैनल तैयार किया गया।
मकबूल भट्ट की तुलना भगत सिंह से करता था
एसआईए के अनुसार बाबू सिंह दुश्मनों से ऑनलाइन मीटिंग और इंटरव्यू में मकबूल भट्ट की तुलना भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु से करता था। उसने मकबूल भट्ट को जम्मू-कश्मीर की आजादी का सेनानी और शहीद बताया। एक इंटरव्यू में बाबू सिंह ने भारत सरकार को अनुच्छेद 370 हटाए जाने पर जम्मू-कश्मीर को तोड़ने की चेतावनी दे दी।
हिजबुल से संबंधों के पुख्ता सुबूत
एसआईए ने चार्जशीट में कहा है कि बाबू सिंह के हिजबुल मुजाहिदीन के साथ संबंधों के पुख्ता सुबूत हैं। सिंह के मोबाइल फोन समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से स्पष्ट होता है कि उसके मंसूबे देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता को चुनौती दे रहे थे।