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Jammu : बारिश से फेर दिया मेहनत पर पानी, फिर भी लाठी-डंडे लेकर टमाटर की रखवाली कर रहे हैं घाटी के किसान

Thu, 13 Jul 2023 02:02 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

160 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिकने वाले टमाटर की फसल भी चौपट हो चुकी है। बाढ़ के पानी से जो फसल बची है, उसे मवेशियों व चोरी होने से बचाने के लिए किसान खेतों में लाठी डंडे लेकर रखवाली कर रहे हैं।
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टमाटर के खेत में मुस्तैद किसान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जम्मू-कश्मीर में बीते पांच दिनों में हुई मूसलाधार बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। 160 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिकने वाले टमाटर की फसल भी चौपट हो चुकी है। बाढ़ के पानी से जो फसल बची है, उसे मवेशियों व चोरी होने से बचाने के लिए किसान खेतों में लाठी डंडे लेकर रखवाली कर रहे हैं।

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बारिश से कई एकड़ भूमि पर लगा टमाटर सड़ चुका है। यहां पर टमाटर के अलग-अलग किस्मों की खेती होती है। इनमें स्काटा, लाल सोना, रॉयल, पानी, गोल्डन, रिजवान किस्म के टमाटर शामिल हैं। परगवाल के गारखाल गांव के किसानों की टमाटर की फसल भी बारिश से बर्बाद हो चुकी है। यहां पर करीब बारह एकड़ भूमि पर टमाटर की खेती होती है।
इसके अलावा बडगाम में पालीवाल बनाकर किसान टमाटर की खेती करते हैं।

किसान नसीम, आदिल का कहना है कि मूसलाधार बारिश की वजह से फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। खेतों में पानी भर जाने से टमाटर की फसल सड़ चुकी है। इस समय बाजार में टमाटर 160 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। उन्होंने कहा कि उम्मीद थी कि इस बार अच्छा मुनाफा होगा, लेकिन बारिश ने मेहनत पर पानी फेर दिया। अब जो फसल बची है, उसकी मवेशियों व अन्य से बचाव के लिए रखवाली करनी पड़ रही है। इसके लिए लाठी-डंडे लेकर खेतों में जाना पड़ रहा है।
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जुए के जैसी है टमाटर की खेती...
टमाटर की फसल जुए के समान है। टमाटर का एक कैरेट 50 से लेकर 1500 रुपये तक भी बिक जाता है। यदि बाहरी राज्यों में टमाटर की पैदावार कम होती है तो यहां के किसान मालामाल हो जाते हैं। दूसरे राज्यों में अच्छी पैदावार से यहां के किसान को घाटा सहना पड़ता है।

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