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जम्मू: नौ साल बाद भी सुपर स्पेशियलिटी में इमरजेंसी नहीं, आपात सेवाओं के लिए जीएमसी का सहारा

Sun, 13 Aug 2023 05:12 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

जीएमसी की इमरजेंसी में रोजाना 8 से 10 हार्ट अटैक और 10 से 15 तक स्ट्रोक के मामले आ रहे हैं। हार्ट अटैक के मामलों को देखने के लिए अधिकांश पीजी और रजिस्ट्रार जिम्मेदारी निभाते हैं, जिसमें गंभीर व वीआईपी मामलों में सलाहकार डॉक्टर को ऑनकॉल बुला लिया जाता है।
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Super Specialty Hospital Jammu - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल जम्मू के शुरू होने के नौ साल बाद भी यहां इमरजेंसी स्थापित नहीं हो पाई है। इस अस्पताल में सुपर स्पेशियलिटी में कार्डियोलॉजी, कार्डियो वैस्कुलर थैरेसिक सर्जरी (सीवीटीएस), नेफरोलाजी, यूरोलाजी और कार्डियोलाजी विभाग काम कर रहे हैं। 

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इन विभागों में रोजाना 1500 से 2000 मरीजों की ओपीडी होती है, लेकिन आपात सेवाओं के लिए मरीजों को जीएमसी की इमरजेंसी पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है। यहां प्राथमिक उपचार के बाद मरीजों को आगे की चिकित्सा के लिए सुपर स्पेशियलिटी में भेजा जाता है। लेकिन इस सारी प्रक्रिया में मरीज को उचित चिकित्सा मिलने में समय लग जाता है। मरीजों की मांग है कि जीएमसी की इमरजेंसी में भी कार्डियो और न्यूरो के सलाहकार डॉक्टरों की चौबीस घंटे उपलब्धता सुनिश्चित होनी चाहिए, ताकि उन्हें समय पर उचित उपचार मिल सके।

जीएमसी की इमरजेंसी में रोजाना 8 से 10 हार्ट अटैक और 10 से 15 तक स्ट्रोक के मामले आ रहे हैं। हार्ट अटैक के मामलों को देखने के लिए अधिकांश पीजी और रजिस्ट्रार जिम्मेदारी निभाते हैं, जिसमें गंभीर व वीआईपी मामलों में सलाहकार डॉक्टर को ऑनकॉल बुला लिया जाता है, लेकिन अधिकांश कार्डियो सलाहकार डॉक्टर सुपर स्पेशियलिटी के कार्डियोलॉजी विभाग में ही व्यस्त रहते हैं। 
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इसी तरह उच्च रक्तचाप और अन्य कारणों से स्ट्रोक के मामलों में बढ़ोतरी हुई है और ये सभी मामले जीएमसी की इमरजेंसी में पहुंचते हैं। इन मामलों को भी अधिकांश रजिस्ट्रार और डीएनबी स्तर के विद्यार्थी देख रहे हैं। जिसमें इंटरवेंशन की जरूरत पड़ने पर मरीज को सुपर स्पेशियलिटी में शिफ्ट किया जाता है। अब सवाल यह उठता है कि अगर सुपर स्पेशियलिटी में सभी विशेष विभाग चलाए जा रहे हैं, तो इमरजेंसी का अब तक प्रावधान क्यों नहीं किया गया।

कुंजवानी निवासी इंद्रपाल सिंह ने बताया कि वह पिछले दिनों अपने मरीज को कार्डियो की शिकायत होने पर जीएमसी की इमरजेंसी में ले गए थे, जिसमें प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें सुपर स्पेशियलिटी में शिफ्ट किया गया था। लेकिन अगर सुपर स्पेशियलिटी में ही सीधे इमरजेंसी का प्रावधान होता तो हम वहीं पर मरीज को सीधे ले जाते। 

जीएमसी प्रशासन अब जीएमसी की इमरजेंसी में सलाहकार डॉक्टरों की चौबीस घंटे उपलब्धता सुनिश्चित बना रहा है तो ऐसे में कार्डियो के सलाहकार डॉक्टर का भी प्रावधान किया जाना चाहिए।

सरवाल निवासी विमल गुप्ता ने कहा कि चाहे कहीं भी इमरजेंसी हो, लेकिन गंभीर बीमारियों के सलाहकार डॉक्टर का वहां चौबीस घंटे उपलब्ध रहना चाहिए, जिससे ऐसे संवेदनशील मामलों में मरीज को शुरू से ही उचित इलाज मिल सके। जुल्लाका मोहल्ला निवासी रवि कुमार ने कहा कि खासतौर पर शहरवासी सभी गंभीर बीमारियों के लिए जीएमसी की इमरजेंसी पर निर्भर हैं। 

मौजूदा समय में हार्ट अटैक और स्ट्रोक के मामले अधिक बढ़ रहे हैं, ऐसे में इमरजेंसी में अन्य विभागों के साथ कार्डियो और न्यूरो के सलाहकार भी शाम के बाद उपलब्ध करवाए जाने चाहिएं। पक्की ढक्की निवासी गगनदीप ने कहा कि अगर जीएमसी की इमरजेंसी में कार्डियो और न्यूरो के सलाहकार डॉक्टर चौबीस घंटे उपलब्ध होते हैं, तो रोगी चिकित्सा देखभाल मजबूत होगी।

इमरजेंसी को मजबूत बनाया जा रहा : प्रिंसिपल

जीएमसी के प्रिंसिपल डॉ. आशुतोष गुप्ता का कहना है कि सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के कार्डियोलाजी और न्यूरोलाजी विभाग पर पहले से ही मरीजों का लोड है, जिन्हें सलाहकार डॉक्टर देख रहे हैं, लेकिन हम कोशिश कर रहे हैं कि जीएमसी की इमरजेंसी में मरीजों को सभी उचित चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें।

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