शिक्षा विभाग के सक्षम प्राधिकरण की अनुमित के बिना अब स्कूल शिक्षक उच्च शिक्षा हासिल नहीं कर सकेंगे। दूरस्थ या ऑनलाइन मोड से उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए उन्हें अनुमित लेनी अनिवार्य होगी।
जम्मू-कश्मीर में शिक्षा विभाग के सक्षम प्राधिकरण की अनुमित के बिना अब स्कूल शिक्षक उच्च शिक्षा हासिल नहीं कर सकेंगे। दूरस्थ या ऑनलाइन मोड से उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए उन्हें अनुमित लेनी अनिवार्य होगी। इससे उनकी वरिष्ठता सहित अन्य संवर्गों को अंतिम रूप देने में बाधा नहीं आएगी। प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक हैं, जिन्होंने सक्षम प्राधिकरण की अनुमित के उच्च शिक्षा हासिल की हैं और 2011 से उनकी वरिष्ठता सूची नहीं बनी थी।
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हालांकि, अब स्कूल शिक्षा विभाग ने ऐसे शिक्षकों को एकमुश्त छूट दी है। ऐसे शिक्षकों द्वारा हासिल की डिग्री की जांच के लिए जम्मू और कश्मीर संभाग ने दो अलग-अलग समितियां गठित की हैं। इसमें स्कूल शिक्षा निदेशकों को समिति का अध्यक्ष बनाया है, जिसमें तीन -तीन सदस्य होंगे।
ये समितियां पद्दोन्नति के उद्देश्य से उक्त शिक्षकों को वरिष्ठता सूची में शामिल करने के लिए उनके द्वारा हासिल की गई डिग्रियों की जांच करेंगी।
इसमें देखा जाएगा कि जिन विश्वविद्यालयों से इन्होंने डिग्रियां हासिल की हैं उसे जम्मू-कश्मीर प्रशासन मान्यता देता है या नहीं। समितियों को दो माह में जांच पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि वरिष्ठता सूची तैयार की जा सके। स्कूल शिक्षा विभाग के प्रशासिनक सचिव पीयूष सिंगला ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं।
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लेक्चरर फोरम ने किया सरकार के फैसले का स्वागत
ऑल जम्मू-कश्मीर प्लस टू लेक्चरर्स फोरम ने सक्षम प्राधिकरण की अनुमित के बिना उच्च शिक्षा हासिल करने वालों को एकमुश्त छूट देने के शिक्षा विभाग के फैसले का स्वागत किया है। फोरम लंबे समय से इसकी मांग कर रहा था। सदस्यों ने कहा कि एक फरवरी 2024 को फोरम के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासनिक सचिव पीयूष सिंगला से मुलाकात कर विभिन्न मुद्दों को उजागर किया था।
बैठक में उन्होंने आश्वासन दिया था की जल्द इन्हें सुलझा लेंगे। सदस्यों ने विशेष सचिव स्कूल शिक्षा विभाग कांता देवी और थन्नाजी भट्ट के समर्थन के लिए भी आभार व्यक्त किया। साथ ही उम्मीद जताई है कि विभाग जल्द ही प्रभारी व्याख्याताओं के नियमितीकरण का आदेश जारी करेगा। फोरम के चेयरमैन आरएस सलाथिया, अध्यक्ष प्रदीप सिंह रकवाल ने सरकार के इस आदेश का स्वागत किया है।