अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू विकास प्राधिकरण (जेडीए) में संपत्तियों के रिकॉर्ड में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। कर्मचारियों ने दलालों के साथ मिलकर 350 से ज्यादा आवास और प्लॉटों की फाइलें और दस्तावेज गायब कर दिए। ऐसा 2014 से 2019 के बीच हुआ। ताज्जुब की बात है कि जेडीए कार्यालय के रिकॉर्ड सेक्शन से फाइलें और दस्तावेज गायब होते रहे, मगर इसकी भनक किसी को नहीं लगी। मामले को दबाने के लिए डुप्लीकेट दस्तावेज बनाकर लोगों को थमाए जाने लगे तो अगस्त में घपले का खुलासा हुआ। मामले की तह में जाने पर पता चला है कि पूर्व सरकार के दौरान कर्मचारियों और अधिकारियों ने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए शहर के विभिन्न इलाकों में स्थित संपत्तियों के दस्तावेज गायब कर दिए।
जानकार बताते हैं कि कोरोना काल के बाद जब प्लॉट और आवासों के आवंटी किस्त या फिर टैक्स जमा करवाने के लिए जेडीए कार्यालय आए तो उन्हें जानकारी मिली कि फाइलें रिकॉर्ड रूम में नहीं हैं। धीरे-धीरे मामला खुलता गया और एक के बाद 350 से अधिक दस्तावेज गायब मिले। इसके बाद जेडीए में हड़कंप मच गया और जिम्मेदार गुपचुप तरीके से डुप्लीकेट फाइल तैयार करवाने में लगे रहे। पुराने दस्तावेज गुम होने और नई फाइल बनाने पर कुछ अलॉटियों ने आपत्ति जताई। नए दस्तावेज तैयार करने का काम 2021 तक चला। आवंटियों के विरोध के बाद मामले ने तूल पकड़ा। जेडीए ने जांच के नाम पर खानापूर्ति की। पिछले साल छह महीने तक लंबी जांच में न तो किसी को दोषी ठहराया और न ही जिम्मेदारी तय की। यही नहीं, जेडीए के सचिव मामले में कुछ भी बताने से किनारा करते रहे।
इन सवालों से घिरी जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली
1. रिकॉर्ड सेक्शन में अलमारियों की चाबियां कर्मचारियों के पास रहती हैं, फिर भी कैसे फाइलें गुम हो गईं।
2. आवंटन दस्तावेज रखने के लिए डिवीजन एक-दो और तीन में इंचार्ज क्या करते रहे।
3. तीनों डिवीजन की रखवाली में करीब 200 कर्मचारी हैं। सुरक्षा के बावजूद दस्तावेज कहां चले गए।
4. साल दर साल फाइलें गायब होती रहीं और अधिकारी अनजान रहे, यह कैसे संभव है।
जांच में कब कितनी फाइलें गुम
2014-53, 2015-42, 2016-55, 2017-67, 2018-47, 2019-49
नोट- 37 फाइलों की जानकारी जेडीए एकत्रित कर रहा है।
पूरे मामले की जांच कराई थी। इसके बाद कुछ आवंटियों को डुप्लीकेट दस्तावेज दिए। अब मामला शासन के पास है।
-साहिल कुमार, सचिव, जेडीए