संवाद न्यूज एजेंसी
पुंछ। पिछले दो दिनों से जिले के निचले क्षेत्रों में जारी बारिश और पीरपांचाल के पहाड़ों पर हो रही भारी बर्फबारी के बीच मुगलरोड पर बक्करवाल समुदाय के सात लोग और उनकी तीन सौ से अधिक भेड़ बकरियां फंस गई। 12 घंटों से अधिक समय तक लोग फंसे रहे। इस दौरान सूचना मिलने पर शुक्रवार को पीडब्ल्यूडी मैकेनिकल विंग के अधिकारी एवं कर्मचारी मसीहा बन कर पहुंचे और भारी बर्फबारी के बीच मार्ग से बर्फ हटाने के साथ ही बर्फ में फंसी भेड़ बकरियों को बक्करवालों के साथ सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। बक्करवालों ने अधिकारियों का आभार प्रकट किया। साथ ही बताया कि अगर यह लोग उनकी सहायता के लिए न पहुंचते तो हम सभी भी बर्फ में ही मारे जाते।
पीडब्लयूडी मैकेनिकल विंग के असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर मोहम्मद तारिक खान ने बताया कि हिमस्खलन एवं पत्थर गिरने की वजह से हमने पिछले तीन दिनों से चलाए जा रहे मुगलरोड से बर्फ हटाने के अभियान को बंद कर दिया था। मशीनें भी पोशाना में लाई हुई थी। अचानक मेरे मन में ख्याल आया कि कहीं बर्फबारी में कोई खानाबदोश फंसा न हो यही सोच कर मैंने जूनियर इंजीनियर सफीर अहमद को फोन कर मशीनें और कर्मचारियों को साथ लेकर एक बार 42 किलो मीटर तक जाने को कहा, जिसके बाद वह जब नीलिना टाप में पहुंचे तो उन्होंने देखा कि एक टाटा मोबाइल गाड़ी वहां फंसी हुई है और उसके आगे पीछे दोनों तरफ एवलांच आया हुआ है। उन्होंने जब वहां से बर्फ हटाई तो एक किलो मीटर आगे कुछ भेड़ें और तीन लोगों को बर्फ में फंसे हुए देखा और उनके पास पहुंच कर उन्हें वहां से भेड़ बकरियों के साथ पीछे की तरफ निकाला तो उन्होंने बताया कि उनके चार और साथी दो किलोमीटर आगे फंसे हुए है। इसके बाद आगे भारी बर्फबारी एवं करीब दो मीटर लंबा एवलांच होने के कारण हमारी मशीनें आगे नहीं बड़ पाई तो जेई सफीर अपने साथ कर्मचारियों को लेकर बर्फबारी के बीच तीन फुट मोटी बर्फ की चादर पर पैदल चल कर उनके पास पहुंचे और उन्हें भी भेड़ बकरियों सहित सुरक्षित निकाल कर लाया। जहां लोग फंसे हुए थे वहां मोबाइल नेटवर्क भी नहीं था।उधर बर्फ में फंसे बक्करवालों का कहना है कि हम लोगों ने तो बचने की उम्मीद ही छोड़ दी थी, जब बर्फबारी तेज हो गई तो जिस टाटा मोबाइल में सवार थे तो उसका चालक हमें वहां छोड़ कर फरार हो गया। इसके बाद हम लोग पैदल आगे बढ़ने लगे कि किसी तरह पीर की गली तक पहुंच जाएं क्योंकि वहां पर बक्करवालों के डेरे बने हुए हैं। बर्फबारी से के चलते हम बीच रास्ते में फंस गए। रात भर से लेकर दोपहर तक बर्फबारी में फंसे रहे, जिससे हमारी दस भेड़ बकरियां मारी गई। पीडब्ल्यूडी कर्मचारी न आते तो हम लोग बच नहीं पाते।