बर्फबारी देखने की लालसा बनी काल, उधमपुर के टिकरी में हुए सड़क हादसे में फतू चौगान के दंपती सहित दो बच्चियों की गई जान
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। टिकरी में हुए सड़क हादसे में एक ही परिवार के चार लोगों की मौत से हर कोई सदमे में है। पोस्टमार्टम के बाद जैसे परेड के फतू चौगान स्थित घर में चार पार्थिव शरीर पहुंचे तो हर किसी की आंखें नम थीं। परिवार के अन्य सदस्यों का रो-रो कर बुरा हाल था। इस दौरान काफी संख्या में पहुंचे लोगों को पीड़ित परिवार को ढांढ़स बधाते देखा गया। दोपहर के समय चारों का जोगी घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस दौरान हर किसी की आंखें नम थीं। नितिन के भाई ने मुखाग्नि दी।
बर्फबारी देखने की लालसा के बाद परिवार ने रात को ही पटनीटॉप जाने की योजना बनाई थी। रविवार की छुट्टी थी। ऐसे में रात का खाना खाने के बाद परिवार रवाना हुए, ताकि रविवार सुबह बर्फबारी का आनंद लेकर दोपहर बाद लौट सके, लेकिन उन्हें नहीं पता था की ये उनका आखिरी सफर होगा।
सड़क हादसें में मृतक नितिन डोगरा बीसी रोड में ट्रेवल एजेंट का काम करता था। पत्नी गृहणी थी। बड़ी बेटी वाणी जैन स्कूल में दसवीं कक्षा, जबकि सबसे छोटी बेटी खुशी ओरियंटल स्कूल में चौथी कक्षा में पढ़ती है। मृतक वाणी की प्री बोर्ड परीक्षा हो रही थी और सोमवार को उसका पेपर था। हादसे में बची बृंदा नौवीं कक्षा की छात्रा है। बृंदा को यकीन नहीं हो रहा है कि उसके माता-पिता और बहनें अब नहीं है।
नहीं पता था कि हमारे साथ ऐसा कुछ होगा : वृंदा
आंख खुली तो देखा पापा के चेहरे पर लगे शीशे, मुंह और आंखों से निकल रहा था खून
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। सड़क हादसे में बची वृंदा ने बताया कि हम सब रात को दस या साढ़े दस बजे के बीच घर से पटनीटॉप के लिए निकले थे। बर्फबारी देखकर रविवार को ही लौट आना था, क्योंकि दीदी का सोमवार को पेपर था। हादसे वाले स्थान पर हमारी कार को अचानक पीछे से टक्कर लगी और वह पलट कर आगे चल रहे ट्रक से नीचे जा घुसी। कुछ देर बाद आंख खुली तो देखा कि पापा के चेहरे पर शीशे लगे थे और मुंह व आंखों से खून बह रहा था।
हादसे से सहमी वृंदा को यकीन नहीं हो रहा है कि उसके माता-पिता और दो बहनें अब इस दुनिया में नहीं हैं। बृंदा ने रोते हुए बताया कि पापा कार चला रहे थे, मां आगे बैठी थी। मैं पापा के पीछे वाली सीट पर और छोटी बहन (खुशी) बीच में थी। दीदी (वाणी) दूसरी तरफ की खिड़की के साथ थी। जहां हादसा हुआ वहां ट्रैफिक जाम था। हमारी कार एक ट्रक की पीछे थी। अचानक कार को जोरदार टक्कर लगी और वह उछल कर आगे चल रहे ट्रक से टकराई और उसके नीचे घुस गई। मुझे कंधे पर चोटी लगी और सीट से नीचे गिर गई। जब लोग हमे निकालने आए तो मेरी आंख खुली। मेरी नजर पापा पर पड़ी तो देखा कि उनके चेहरे पर शीशे लगे थे और उनके मुंह व आंखों से खून निकला रहा था। इसके बाद हमें अस्पताल लाया गया, जिसके बाद मुझे पता नहीं चला क्या हुआ।