केंद्रीय शिक्षामंत्री ने किया आईआईएम का दौरा कर निर्माणाधीन कार्याें का लिया जायजा
विकसित भारत पहल को लेकर छात्रों से की चर्चा
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत गेम चेंजिंग सुधारों के युग में है। भारत में 2014 के बाद तेजी से बदलाव आया है। यह दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। प्रधानमंत्री का कल्याणवाद माडल एक केस स्टडी है। आईआईएम जम्मू को इसकी सूक्ष्मता से जांच करने और प्रदेश के लिए अद्वितीय प्रस्तावों व संभावनाओं पर दीर्घकालिक अध्ययन के लिए प्रोत्साहित करना चाहूंगा। यह बातें उन्होंने वीरवार को आईआईएम जम्मू के दौरे के दौरान छात्रों से रूबरू होते हुए कहीं।
इस दौरान उन्होंने आईआईएम में चल रहे निर्माणाधीन कार्याें का जायजा करने के साथ ही अन्य गतिविधियों की समीक्षा की। प्रधान ने केंद्र सरकार की विकसित भारत पहल के बारे में जानकारी दी। उन्होंने संस्थान में अत्याधुनिक पुस्तकालय का भी दौरा किया और छात्रों को एक व्यापक शिक्षण पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करने के लिए उपलब्ध उच्च तकनीक सुविधाओं की सराहना की।
मंत्री ने विकसित भारत को लेकर छात्रों से बातचीत भी की। छात्रों ने विकसित भारत को लेकर पूछे गए सवालों पर मंत्री ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहल के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि सरकार नई शिक्षा नीति 2020 के एक हिस्से के रूप में शिक्षा तक समान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए योजना बना रही है। उन्होंने मानव जाति के समग्र विकास में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के महत्व पर जोर दिया।
आनंदम केंद्र दूर करेगा छात्रों का तनाव
चेयरमैन बोर्ड ऑफ गवर्नर डा. मिलिंद पी कांबले ने आईआईएम जम्मू द्वारा शुरू की गई प्रमुख पहलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आनंदम केंद्र की स्थापना की है, जिसका उद्देश्य छात्रों के शैक्षणिक तनाव को दूर करना है। विविधता और समावेशन केंद्र की स्थापना एक समावेशी और विविध शिक्षा प्रदान करने की हमारी प्रतिबद्धता का एक प्रमाण है। यह पहलें विकसित भारत पहल के हिस्से के रूप में 2047 तक विकसित भारत के हमारे दृष्टिकोण के साथ सहजता से संरेखित हैं। निदेशक प्रोफेसर बीएस सहाय ने कहा कि आईआईएम जम्मू विकसित भारत के लिए समर्पित है। इस परिवर्तनकारी पहल में सक्रिय भागीदारी को रेखांकित किया। उन्होंने 2047 तक एक विकसित और संपन्न भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप शैक्षिक परिदृश्य को आकार देने के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।