आरक्षित वर्ग के कर्मचारी 130 दिनों से हड़ताल पर हैं। तबादला नीति की मांग पर वह प्रदर्शन कर रहे हैं। घाटी में कार्यरत 3500 से अधिक कर्मचारियों के 450 से अधिक बच्चों की पढ़ाई अधर में है।
कश्मीर संभाग में कार्यरत आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों के सामने फिलहाल आगे कुआं पीछे खाई जैसी स्थिति है। घाटी में लौटना वह खतरे से खाली नहीं मान रहे, तो वहीं जम्मू आने के बाद से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। बच्चे तीन माह से स्कूल से दूर हैं।
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आरक्षित वर्ग के कर्मचारी 130 दिनों से हड़ताल पर हैं। तबादला नीति की मांग पर वह प्रदर्शन कर रहे हैं। घाटी में कार्यरत 3500 से अधिक कर्मचारियों के 450 से अधिक बच्चों की पढ़ाई अधर में है। लक्षित हत्या के डर से अभिभावक न तो बच्चों को स्कूल भेज पा रहे हैं, न तो खुद वहां जाने के पक्ष में हैं। मिड सीजन में स्कूल भी बच्चों को ट्रांसफर सर्टिफिकेट नहीं दे रहे हैं।
आरक्षित वर्ग के कर्मचारी विपिन कुमार ने कहा कि जिन अभिभावकों के बच्चे छोटी कक्षाओं में पढ़ते हैं, वह तो बच्चों को घाटी के स्कूलों से निकाल रहे हैं, लेकिन जिनके बच्चे बड़ी कक्षाओं में पढ़ते हैं, उनके लिए बड़ी परेशानी है। शैक्षणिक सत्र का मिड सीजन होने के चलते न तो जम्मू में उन्हें प्रवेश मिल रहा है न कश्मीर के स्कूल से ट्रांसफर सर्टिफिकेट। तबादला नीति को लेकर सरकार को जल्द फैसला लेना चाहिए। इससे कर्मचारियों को राहत मिलने के साथ बच्चों की पढ़ाई सुचारू होगी।