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जम्मू-कश्मीर: सज्जाद लोन बोले- चुनावी जनसांख्यिकी बदली तो भूख हड़ताल करेंगे, सरकार का स्पष्टीकरण स्वीकार नहीं

Mon, 22 Aug 2022 09:23 PM IST
प्रशांत कुमार अमर उजाला ब्यूरो,  श्रीनगर।

सार

लोन ने कहा, "हम इंतजार करेंगे और देखेंगे और अगर जम्मू-कश्मीर की जनसांख्यिकी को बदलने का प्रयास किया गया, तो हम भूख हड़ताल करेंगे।" 
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Sajjad Lone - फोटो : twitter
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विस्तार
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पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद गनी लोन ने सोमवार को कहा कि अगर सरकार ने जम्मू-कश्मीर की चुनावी जनसांख्यिकी को बदलने का प्रयास किया तो वे संसद और अन्य संवैधानिक निकायों के सामने भूख हड़ताल पर बैठेंगे। श्रीनगर में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अगर सरकार जम्मू-कश्मीर की जनसांख्यिकी को बदलने का प्रयास करती है तो वे संसद के सामने भूख हड़ताल पर बैठेंगे। 

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सज्जाद ने कहा, कानून (रिप्रजेंटेशन ऑफ द पीपल्स एक्ट-1951) हमारे लिए खतरा नहीं है, लेकिन सरकार की मंशा हमारे लिए खतरा है।" उन्होंने कहा कि वे न तो जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा जारी स्पष्टीकरण को स्वीकार करते हैं और न ही इसे अस्वीकार करते हैं।
           
वरिष्ठ पीसी नेता और पूर्व कानून सचिव मोहम्मद अशरफ मीर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की मतदाता सूची में गैर-स्थानीय लोगों को शामिल करने के बारे में मुख्य निर्वाचन अधिकारी के दावे कानून द्वारा समर्थित नहीं हैं। उन्होंने कहा, “कानून स्पष्ट है कि व्यक्ति को काफी समय तक उस स्थान का अभ्यस्त निवासी होना चाहिए। सेवा मतदाता (सशस्त्र बलों के सदस्य) केवल अपने मूल निर्वाचन क्षेत्रों के लिए मतदान कर सकते हैं, चाहे उनकी तैनाती का स्थान कुछ भी हो।”          

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गौरतलब है कि यह संवाददाता सम्मेलन पीएजीडी की ऑल पार्टी मीटिंग से पूर्व आयोजित हुआ और जब उनसे इसमें शमहूलियत को लेकर सवाल सवाल पूछा गया तो सज्जाद ने कहा अगर इससे कुछ ठोस निकलता है तो हम उसका समर्थन करेंगे। उन्हें भी हमारे कार्यक्रम का समर्थन करना चाहिए।" लोन ने कहा कि उन्हें आज बैठक के लिए आमंत्रित किया गया है। उन्होंने कहा, "राजनीति के अलावा, मैं डॉ फारूक अब्दुल्ला के लिए बहुत सम्मान करता हूँ। लेकिन वास्तविकता यह है कि अगर सर्वदलीय बैठक को गंभीरता से लिया जाता है, तो मीडिया को इसके बारे में कोई जानकारी नहीं होती।”
         
उन्होंने आगे कहा कि ''हम कितना दिखावा करते हैं कि सब कुछ ठीक है। हम लगभग हर दिन एक-दूसरे को गालियां देते रहे हैं।” उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि मतदाताओं के संबंध में सरकार के कदम का नतीजा नहीं बदलेगा कि हम सर्वदलीय बैठक में शामिल हों या नहीं।" उन्होंने कहा, "भविष्य में अगर डॉ फारूक को हमारी जरूरत है, तो हम बस एक कॉल दूर होंगे, लेकिन महबूबा मुफ्ती अपनी साख वापस लेने के लिए बेताब हैं, सर्वदलीय बैठक के लिए कहेंगी, महाराजा हरि सिंह का समय चला गया है।
         
अगर हमें कुछ गंभीर करना है, तो वह बिना मीडिया की निगाह के किया जाना चाहिए। मीडिया की निगाह में कुछ भी करने से उसकी प्रासंगिकता खत्म हो जाती है और इसका मतलब है पॉइंट स्कोरिंग। मैं पॉइंट स्कोरर नहीं बनना चाहता। अगर कुछ ठोस निकलता है तो हम भी उनका समर्थन करेंगे। अगर उन्हें 01 अक्टूबर को कोई प्रतिकूल परिणाम महसूस होता है, तो उन्हें भी हमारा समर्थन करना
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